इलाहाबाद में हुए हादसे के बाद
आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। राज्य सरकार हादसे के लिए
केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने में जुटी थी तो राज्य सरकार इस हादसे के
लिए रेलवे को जिम्मेदार बता रही थी। यूपी के गृहसचिव सारा कसूर रेलवे पर
मढ़ रहे थे जबकि कई घंटों बाद तक उन्हें घटना की पूरी खबर नहीं थी। पहले
उन्होंने कहा कि हादसा रेलिंग टूटने की वजह से हुआ, लेकिन सच्चाई ये है कि
कोई रेलिंग नहीं टूटी।
आला
अधिकारियों को घटना की पूरी जानकारी तक नहीं थी या फिर आधी-अधूरी जानकारी
के आधार पर वो घंटों जनता को गुमराह करते रहे। हादसे के तुरंत बाद लखनऊ में
सूबे के गृह सचिव सुभाष शर्मा ने बयान दिया कि हादसा रेलिंग टूटने की वजह
से हुआ, लेकिन देश के रेल मंत्री ने इसका खंडन कर दिया। रेल मंत्री पवन
बंसल ने कहा कि उनकी जानकारी में रेलिंग नहीं टूटी। आईबीएन7 संवाददाता मनोज
राजन त्रिपाठी ने भी मौके पर अपनी पड़ताल में पाया कि कहीं कोई रेलिंग
नहीं टूटी।
दूसरी तरफ हादसे के घंटों बाद गृह सचिव सुभाष शर्मा एक बार फिर मीडिया के
सामने आए और आधी रात को जानकारी देने के लिए बुलाई गई प्रेसकॉन्फ्रेंस में
भी गृहसचिव को घटना की पूरी जानकारी नहीं थी। उन्होंने मीडिया को बताया कि
इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर जब लोग लौट रहे थे तब फुट ओवर ब्रिज पर भगदड़ मची
है। शायद धक्का मुक्की की वजह से पहले दो चार लोग गिरे। इसी दौरान राज्य
के गृह सचिव ने अपनी पुलिस का बचाव भी किया और स्टेशन पर लाठीचार्ज की बात
से इनकार किया, लेकिन जब पत्रकारों ने तस्वीरों का हवाला देकर सवाल पूछे तो
वो उठकर जाने लगे। गृह सचिव के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं था कि आखिर
हादसे के बाद घायलों तक मदद पहुंचाने में तीन घंटे से ज्यादा क्यों लगे?
प्लेटफॉर्म पर शवों के साथ जानवरों जैसा सलूक क्यों किया गया? स्टेशन पर
लाशें ढकने के लिए कपड़े नहीं थे, जो जहां था वहीं घंटों पड़ा रहा।
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