पिछले कुछ दिनों में क्रेडिट कार्ड से होने
वाले फ्रॉड के कई मामले सामने आए हैं। क्रेडिट कार्ड हम में से कई लोग
इस्तेमाल करते हैं, पर क्रेडिट कार्ड से होने वाले खतरे और उससे बचने के
तरीके हमें नहीं पता होते हैं।
क्रेडिट
कार्ड के जहां कई फायदे हैं, तो इससे जुड़े झमेले भी बड़े हैं। अगर गलत
हाथों में क्रेडिट कार्ड पड़ गया, तो हार्ट अटैक तो पक्का समझिए। पर वो कहते
हैं ना कि अगर खतरे की जानकारी हो तो खतरे में पड़ने की संभावना कम हो जाती
है। लिहाजा आइए जानते हैं कि क्रेडिट कार्ड से किस-किस तरह के फ्रॉड हो
सकते हैं।
सबसे
पहले जानते है स्किमिंग के बारे में। ये स्किम का स्कैम बड़ा ही खतरनाक हो
सकता है। स्किमिंग में सायबर क्रिमिनल किसी पोर्टेबल स्कैनर की मदद से आपके
कार्ड की कॉपी बना देते हैं। होता ये है कि आपने पेमेंट के लिए अपना कार्ड
दिया, आपके कार्ड को क्रिमिनल किसी ऐसी मशीन से स्वाइप कर देगा, जिससे
कार्ड की मैगनेटिक स्ट्रिप में मौजूद सारी जानकारियां उसके पास पहुंच
जाएंगी। अब इस जानकारियों की मदद से अपराधी घर बैठे आराम से नकली क्रेडिट
कार्ड छाप सकता है। और आपके नाम पर लाखों खर्च कर सकता है। पर घबराइयें
नहीं, स्किमिंग से बचना है तो कुछ बातें ध्यान में रखिए।
पहली
बात किसी भरोसे की जगह से ही कार्ड से शॉपिंग कीजिए। अपने कार्ड को अपनी
आंखों के सामने ही स्वाइप कराइए और आखिरी लेकिन सबसे अहम कार्ड स्वाइप होने
के बाद ट्रांजैक्शन एसएमएस देखें बगैर काउंटर ना छोड़िये। क्योंकि ऐसा भी
हो सकता है कि सिर्फ कॉपी बनाने के लिए आपका कार्ड जाली तरीके से स्वाइप
किया गया हो इसीलिए ट्रांजैक्शन एसएमएस चेक करना भी जरूरी है।
दूसरा
खतरा फिशिंग का है। इसमें सायबर क्रिमिनल आपको बैंक की जाली वेबसाइट या
जाली ईमेल से स्पैम ईमेल भेजते हैं। और आपसे कहते हैं कि अपना बैंक पासवर्ड
बदल लो, या अपनी फाइनेंशियल डिटेल्स हमें ईमेल कर दो। बस आपने इन ईमेल के
मुताबिक काम किया और आपका अकाउंट साफ हुआ। आपके सारे पासवर्ड अपराधी के
हाथों आराम से लग जाएंगे। कई बार इन ईमेल में अटैचमेंट भी होते हैं, जो
दरअसल मालवेयर्स होते हैं।
तो
अगर फिशिंग से बचना है तो कुछ बातों का ख्याल रखिए। पहली बात किसी भी ईमेल
अटैचमैंट को सोच-समझ कर ही खोलें। किसी भी ईमेल रिक्वेस्ट पर अपनी
फाइनेंशियल डिटेल्स जैसे अकाउंट नंबर, पासवर्ड, सीव्हीव्ही नंबर, जैसी
डिटेल्स ना बताएं। फिर चाहे वो मेल प्रधानमंत्री की मेल आईडी से ही क्यों
ना आई हो।
अब
इस कार्ड के फ्रॉड में तीसरा खतरा है सोशल इंजीनियरिंग का। ये तरीका आजकल
सायबर क्रिमिनल में काफी प्रचलित है। आपके पास एक फोन आयेगा - हेलो जी, मैं
फलां-फलां बैंक से बोल रहा हूं, आपसे एक कार्ड के बारे में बात करनी थी।
आपके फायदे का है जी। आपसे मिलना चाहता था। कब टाइम है।
ऐसा
कह के ये ठग साहब, आपसे मिलेंगे या फोन पर आपका भरोसा जीतेंगे। फायदे
बेहतर रिटर्न या आपको किसी इनाम का लालच देंगे और प्यार-मोहब्बत में आराम
से आपके सारे पासवर्ड आपसे ही उगलवा लेंगे।
अब
इस ठगी की इंजीनियरिंग से बचना है, तो एक बात गांठ बांध लीजिये कि अपने
पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड डिटेल्स आपको किसी को भी नहीं बताने हैं, फिर चाहे
वो बंदा पहली नजर में कितना ही भरोसेमंद और ईमानदार क्यों ना दिखाई दे।
दूसरी बात सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर अपनी सारी रामकहानी ना लिखें, ऐसा कर
के आप ऐसे ठगों को खुद आमंत्रित करते हैं। और अपने दिल की आवाज़ सुनें।
जहां दिमाग, खतरे की घंटी बजाए बस संभल जाइएं।
अब
बात करते है इस कार्ड के फ्रॉड के सबसे खतरनाक एलिमेंट की जो है डेक्सचर।
ये डेक्सचर नाम का मेलवेयर बेहद खतरनाक है, और दुनिया भर की एंटी-वायरस
कंपनियां इससे निपटने का रास्ता ढूंढ रही है। ये मेलवेयर, सीधे रिटेलर के
कंप्यूटर पर हमला करता है। आपने एक बार अपना कार्ड स्वाइप किया, और आपके
कार्ड की सारी डिटेल्स दूर बैठे किसी हैकर के पास पहुंच जाएगी।
इस
डेक्सचर से निपटने के उपाय ढूंढे जा रहे हैं। इससे बचने का तो यही तरीका
है कि भरोसेमंद जगह से शॉपिंग करें और रिटेलर्स अपने सभी बिजनेस सिस्टम्स
में अच्छा एंटी-वायरस डाल कर रखें ताकि आपके ग्राहकों के साथ ऐसा धोखा ना
हो।
बस थोड़ी सी सावधानी आपको ऐसे किसी भी स्कैम या इस कार्ड के फ्रॉड से बचा सकती है।
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