Thursday, January 17, 2013

आसाराम पर 700 करोड़ की जमीन कब्जा करने का आरोप

आसाराम और उनके बेटे पर मध्य प्रदेश के रतलाम में 700 करोड़ रुपए की जमीन हड़पने का संगीन आरोप लगा है। आरोप है कि साल 2001 में रतलाम की एक फैक्ट्री की जमीन आसाराम ने सतसंग के लिए किराए पर ली थी, जिसपर उन्होंने कब्जा जमा लिया। नारायण साईं की वेबसाईट में मंदिर के पास की जमीन आसाराम अपनी बता रहे हैं। पूरे 200 एकड़ जमीन कब्जा करने का आरोप आसाराम पर लग रहा है।
आरोप है कि मध्य प्रदेश के रतलाम की 200 एकड़ जमीन पर आसाराम और उनके बेटे नारायण ने साल 2001 से कब्जा कर रखा है। कभी इस जगह जयंत विटामिन लिमिटेड यानि जेवीएल नाम की कंपनी चला करती थी जो कि 1997 में बंद हो गई। उस वक्त कंपनी की कीमत थी करीब 1200 करोड़ रूपये।
जेवीएल कंपनी के पूर्व कर्मचारी और याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस जमीन पर फिलहाल आसाराम और उनके बेटे नारायण के योग वेदांत समिति का कब्जा है। तमाम फोरम पर आसाराम के इस अवैध कब्जे का मामले उठाने वाले राजीव ओझा के मुताबिक जेवीएल फैक्ट्री की जमीन को आसाराम बापू ने 2001 में 2000 रूपये दिन के हिसाब से 11 दिन के लिए किराये पर लिया था। फैक्ट्री की मालिक प्रेरणा बेन ठाकुर ने जमीन सत्संग के लिए दी थी। 
 लेकिन जेवीएल के पूर्व कर्मचारी के मुताबिक आसाराम और उनके बेटे ने कंपनी की जमीन पर ही कब्जा कर लिया। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस यानि एसएफआईओ की सिफारिश सरकार को मिली है, जिस पर विचार किया जा रहा है। उसने दो साल की तफ्तीश के बाद ये सिफारिश सरकार को भेजी है।
जेवीएल कंपनी की तरफ से जमीन पर कब्जा करने की शिकायत नहीं की गई थी, बल्कि कंपनी के एक शेयर होल्डर ने बंद हो चुकी कंपनी की संपत्ति का सही प्रबंधन कराने के लिए मंत्रालय में शिकायत की थी। आपको बता दें कि बंद कंपनी पर मजदूरों का करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए बकाया है। 
 आसाराम बापू के आश्रम के प्रवक्ता ने कहा है कि जेवीएल कंपनी से आसाराम, नारायण या फिर आश्रम का कोई लेना देना नहीं है। एसएफआईओ ने इन तीनों से इस बारे में कोई पूछताछ नहीं की है। जेवीएल की मालिक ने रतलाम में मांगल्या मंदिर बनाया है और जमीन की देखरेख के लिए जो ट्रस्ट बनाया है उसमें आसाराम का बेटा नारायण भी एक ट्रस्टी है।

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