Wednesday, January 30, 2013

…कहीं यही तो नहीं ‘विश्वरूपम’ पर बैन के पीछे की कहानी!

अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘विश्वरूपम’ पर तमिलनाडु में बैन से अभिनेता कमल हासन खासे दुखी और गुस्से में हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ राजनीतिक खेल खेला जा रहा है। सवाल है कि आखिर जयललिता सरकार की उनसे क्या दुश्मनी है? क्या उनकी फिल्म को किसी साजिश का शिकार बनाया गया है?
दरअसल इस फिल्म पर सबसे पहला विवाद जून 2012 को हुआ जब हिंदू मक्कल काची नाम के एक संगठन ने इस फिल्म का नाम बदलने की मांग की। उसका कहना था कि ‘विश्वरूपम’ तमिल शब्द नहीं है। ये संस्कृत का शब्द है। कमल हासन पर तमिल विरोधी होने के आरोप लगाए गए।
कमल हासन ने फिल्म का नाम नहीं बदला। अब फिल्म के रिलीज होने का वक्त आया तो कुछ मुस्लिम संगठनों ने ये कहकर इसका विरोध शुरू कर दिया कि ये फिल्म उनके समुदाय की भावनाएं आहत करने वाली है। तमिलनाडु में विरोध की ये कमान संभाली तमिलनाडु मुस्लिम मुनेत्र कडगम ने। केरल में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया ने भी कई सिनेमाहॉल के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। विरोध को देखते हुए दक्षिण के कई राज्यों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया। कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन जारी रहा। श्रीलंका और मलेशिया ने भी फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है।
सवाल है कि बाकी राज्य उनकी फिल्म रिलीज करने के लिए तैयार हैं। सेंसर, केंद्र सरकार और कोर्ट को भी कोई दिक्कत नहीं है तो फिर आखिर जयललिता सरकार को क्या परेशानी है। सूत्रों की मानें तो कमल हासन और उनकी ये फिल्म कई गुत्थियों में उलझी हुई है।
असल में कमल हासन अपनी फिल्म ‘विश्वरूपम’ सिनेमाघरों के साथ-साथ डीटीएच पर भी रिलीज करने वाले थे। सूत्रों के मुताबिक डीटीएस के डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स के लिए शुरू में उनकी बात तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की जया टीवी से हुई थी। लेकिन बात नहीं बनी और बाद में इसके राइट्स विजया टीवी को बेच दिए गए। सूत्रों का कहना है कि इसी बात से जयललिता काफी नाराज हैं।
सूत्रों के मुताबिक इसके बाद जयललिता ने राज्य के सभी 31 जिलों के डीएम से फिल्म पर उनकी राय मांगी। एक तरफ से सभी डीएम ने कमल हासन की फिल्म को संवेदनशील और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाला बता डाला जबकि तमिलनाडु का अब तक का कोई इतिहास नहीं रहा है जिससे साबित हो कि वहां दो समुदायों को लेकर किसी तरह का विवाद हुआ हो।
कुछ सूत्र एक अलग विवाद की कहानी भी बता रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ दिन पहले जयललिता, कमल हासन और पी चिदंबरम को एक समारोह में बुलाया गया। वहां वित्त मंत्री चिदंबरम मुख्य अतिथि थे। कमल हासन ने उनकी जमकर तारीफ की। ये भी कहा कि अब देश को धोती वाले प्रधानमंत्री की जरूरत है।
जयललिता और चिदंबरम के बीच का छत्तीस का आंकड़ा किसी से छिपा नहीं है। कहा जा रहा है कि इस घटना ने कमल हासन और जयललिता के बीच की दूरी को और बढ़ा दिया। खैर अब खुद कमल हासन इस विवाद को अपने तरीके से हल करने की कोशिश कर रहे हैं। देखना है कि फिल्म से कुछ विवादित सीन हटा देने के उनके ऐलान के बाद जयललिता सरकार का क्या रवैया होगा।

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