आखिर दिल्ली पुलिस ने इतने बड़े स्पॉट
फिक्सिंग कांड का खुलासा कैसे किया। दरअसल पिछले साल दिसंबर में दिल्ली
पुलिस ने एक फोन कॉल इंटरसेप्ट किया। पुलिस ने मुंबई के एक शूटर और टाइगर
मेमन के बीच हो रही बातचीत सुनी। टाइगर 1993 बम कांड का आरोपी और डी कंपनी
का अहम सदस्य है। कई महीनों की तफ्तीश और कई सौ घंटों की बातचीत सुनने के
बाद तीन खिलाड़ियों और सट्टेबाज तक पुलिस पहुंच पाई।
आईपीएल
6 सीजन शुरू होने के 4 महीने पहले मुंबई का शार्प शूटर फिरोज बेचैन था।
फिरोज ये जानना चाहता था कि आईपीएल 6 में इस बार डी कंपनी के कौन लोग
सट्टेबाजी में शामिल होने जा रहे हैं। फिरोज और सट्टेबाजों की बातचीत
दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर बद्रीश दत्त ने पकड़ी। बद्रीश ने इस बारे में
अपने आला अधिकारियों को जानकारी दी। जिसके बाद दिल्ली पुलिस सट्टेबाजों के
हर एक कॉल को जांचने में जुट गई।
दिल्ली पुलिस ने शॉर्प शूटर फिरोज को इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस पर लिया। जिसके बाद ये पता लगाने की कोशिश शुरू हुई कि डी कंपनी के लोग किस हद तक आईपीएल 6 में सट्टेबाजी में शामिल होने वाले हैं। करीब 5 महीने तक दिल्ली पुलिस के लोग फोन कॉल्स रिकॉर्ड करते रहे, कई सौ घंटों की बातचीत खंगाली जाती रही। दिल्ली पुलिस फिरोज की फोन पर हुई हर बातचीत को रिकॉर्ड कर रही थी। इसी साल के मार्च महीने में दिल्ली पुलिस को पता लगा कि कुछ खिलाड़ियों और सट्टेबाजों के बीच लगातार बातचीत हो रही है।
दिल्ली पुलिस ने शॉर्प शूटर फिरोज को इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस पर लिया। जिसके बाद ये पता लगाने की कोशिश शुरू हुई कि डी कंपनी के लोग किस हद तक आईपीएल 6 में सट्टेबाजी में शामिल होने वाले हैं। करीब 5 महीने तक दिल्ली पुलिस के लोग फोन कॉल्स रिकॉर्ड करते रहे, कई सौ घंटों की बातचीत खंगाली जाती रही। दिल्ली पुलिस फिरोज की फोन पर हुई हर बातचीत को रिकॉर्ड कर रही थी। इसी साल के मार्च महीने में दिल्ली पुलिस को पता लगा कि कुछ खिलाड़ियों और सट्टेबाजों के बीच लगातार बातचीत हो रही है।
सूत्रों
का कहना है कि आईपीएल का सीजन 6 जैसे-जैसे करीब आ रहा था सट्टेबाजों और
खिलाड़ियों के बीच फोन पर बातचीत बार-बार होने लगी। इस दौरान कई बार दिल्ली
पुलिस के लोगों ने सट्टेबाज और कुछ खिलाड़ियों का पीछा भी किया।
क्रिकेटर्स और सटोरियों की गिरफ्तारी के पहले दिल्ली पुलिस उन शहरों के
होटलों में भी गई थी जहां राजस्थान रॉयल्स के मैच हुए थे। ये शहर हैं
दिल्ली, जयपुर और मुंबई।
उधर
स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में गिरफ्तार श्रीशांत को उसी कमरे में रखा गया है
जिसका इस्तेमाल बद्रीश दत्त करते थे। स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर बद्रीश ने
ही सबसे पहले फोन कॉल्स को ट्रैक किया था जिसके बाद आईपीएल में इस काले खेल
का पर्दाफाश हो सका। तीनों क्रिकेटर श्रीशांत, अजीत चंदीला और अंकित
चव्हाण को अलग-अलग कमरों में रखा गया है।
दक्षिणी
दिल्ली के स्पेशल सेल के दफ्तर में इन लोगों खाने में दाल रोटी दी गई थी।
गुरुवार रात तीनों ने थोड़ी बहुत नींद भी ली जिसके बाद खत्म न होने वाले
सवाल जवाब शुरू हुए। सूत्रों का कहना है कि जब श्रीशांत का सामना दिल्ली
पुलिस के कमिश्नर नीरज कुमार से हुआ तो वो रो पड़े। इस के बाद बाकी के दो
खिलाड़ियों से भी पुलिस कमिश्नर ने पूछताछ की। अजीत और अंकित भी नीरज कुमार
के सामने अपने आंसू नहीं रोक पाए।
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