अपनी 2जी और कोयला आवंटन घोटालों की रिपोर्ट को लेकर सरकार में बैठे लोगों के ताने और आलोचनाओं को आमंत्रित करने वाले भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक विनोद राय
ने कहा कि भारत में कैग ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ (सत्ता और व्यवसायियों के
बीच साठगांठ के रिश्ते) के किसी भी मामले को बेनकाब करने का प्रयास जारी
रखेगा.
राय ने सरकार को सलाह दी कि उसे यदि मदद करनी है तो वह उद्यमों की मदद करे न
कि उद्यमी कहे जाने वाले व्यक्तियों की. हार्वर्ड विश्वविद्यालय में एक
व्याख्यान के दौरान उन्होंने कहा, ‘हम बेशक भ्रष्टाचार को समाप्त करने में
सक्षम नहीं हो लेकिन हमारा प्रयास है कि ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ के मामलों को
बेनकाब किया जाए. सरकार को समर्थन देना ही है तो वह देश में उद्यमों को
समर्थन दे न कि किसी उद्यमी विशेष को.’
दूरसंचार क्षेत्र में 2जी आवंटन में हुई गड़बड़ियों और कोयला खानों के आवंटन में सामने आई खामियों को अपनी रिपोर्ट के जरिये उजागर करने वाले कैग विनोद राय को इस रिपोर्टों को लेकर सरकार की आलोचना भी झेलनी पड़ी लेकिन उनका कहना है कि सार्वजनिक लेखापरीक्षक की भूमिका केवल संसद में रिपोर्ट पेश करने तक ही सीमित नहीं होनी चाहिये.
विनोद राय ने सवालिये लहजे में कहा, ‘लोक लेखापरीक्षक होने के नाते क्या हमें केवल संसद में अपनी रिपोर्ट पेश करने तक ही अपनी भूमिका सीमित रखनी चाहिये या फिर इससे आगे बढ़ना चाहिये विशेषकर ऐसे मामलों में, जहां ग्रामीण स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, जल प्रदूषण, पर्यावरण और पेयजल से जुड़े मुद्दे है, उनपर क्षेत्रों में अपनी लेखा परीक्षा टिप्पणियों के संबंध में आम जनता को भी जागृत करना चाहिए.'
कैग द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र को लांघे जाने के मुद्दे पर राय का मानना है कि भारतीय लोकतंत्र अब परिपक्व हो रहा है और शहरी मध्यम वर्ग अब नागरिक क्षेत्र से जुड़े मामलों में ज्यादा रुचि ले रहा है. ‘यह मानते हुये कि आखिर में सार्वजनिक तौर पर होने वाले व्यय में सबसे बड़ी हिस्सेदार जनता ही है, हम नये रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे.’
राय ने कहा कि सरकारी और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की लेखापरीक्षा होने से समाज में विश्वास बढ़ता है और इसका सकारात्मक प्रभाव होता है. राय के अनुसार, ‘लेखा परीक्षा यानी ऑडिट से सरकार के सार्वजनिक कोष से धन का इस्तेमाल करने वालों को एहतियात रहती है कि लेखापरीक्षा होने के बाद जनता को उनके कामकाज के तौर तरीके के बारे में पता चल जायेगा.’
राय ने कहा कि सार्वजनिक लेखापरीक्षक भी उसी तरह सरकारी राजकाज और प्रशासन संचालन को बेहतर करने के काम में लगा हुआ है जैसे प्रशासन की दूसरी एजेंसियां इस काम में लगी हैं. उन्होंने कहा, ‘लेखापरीक्षा करते हुये हम अपने को उनकी तरह नहीं बल्कि खुद को उनके स्थान पर बिठाकर स्थितियों को देखते हैं. हमारी लेखापरीखा अब एक बदलाव से गुजर रही है हम अब सकारात्मक तरीके से रिपोर्टिंग करने लगे हैं.’
राय ने कहा कि जनता के पैसे के इस्तेमाल की लेखापरीक्षा करने वाले सार्वजनिक लेखापरीक्षक को उद्देश्यपरक और विश्वसनीय होना चाहिये. उन्होंने कहा, ‘हम तभी विश्वास हासिल कर सकते हैं जब हमारी बेहतर साख होगी, सक्षम होंगे और नियंत्रणमुक्त होंगे. इसके साथ ही हम अपने काम के लिये भी जवाबदेह हों.’
दूरसंचार क्षेत्र में 2जी आवंटन में हुई गड़बड़ियों और कोयला खानों के आवंटन में सामने आई खामियों को अपनी रिपोर्ट के जरिये उजागर करने वाले कैग विनोद राय को इस रिपोर्टों को लेकर सरकार की आलोचना भी झेलनी पड़ी लेकिन उनका कहना है कि सार्वजनिक लेखापरीक्षक की भूमिका केवल संसद में रिपोर्ट पेश करने तक ही सीमित नहीं होनी चाहिये.
विनोद राय ने सवालिये लहजे में कहा, ‘लोक लेखापरीक्षक होने के नाते क्या हमें केवल संसद में अपनी रिपोर्ट पेश करने तक ही अपनी भूमिका सीमित रखनी चाहिये या फिर इससे आगे बढ़ना चाहिये विशेषकर ऐसे मामलों में, जहां ग्रामीण स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, जल प्रदूषण, पर्यावरण और पेयजल से जुड़े मुद्दे है, उनपर क्षेत्रों में अपनी लेखा परीक्षा टिप्पणियों के संबंध में आम जनता को भी जागृत करना चाहिए.'
कैग द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र को लांघे जाने के मुद्दे पर राय का मानना है कि भारतीय लोकतंत्र अब परिपक्व हो रहा है और शहरी मध्यम वर्ग अब नागरिक क्षेत्र से जुड़े मामलों में ज्यादा रुचि ले रहा है. ‘यह मानते हुये कि आखिर में सार्वजनिक तौर पर होने वाले व्यय में सबसे बड़ी हिस्सेदार जनता ही है, हम नये रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे.’
राय ने कहा कि सरकारी और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की लेखापरीक्षा होने से समाज में विश्वास बढ़ता है और इसका सकारात्मक प्रभाव होता है. राय के अनुसार, ‘लेखा परीक्षा यानी ऑडिट से सरकार के सार्वजनिक कोष से धन का इस्तेमाल करने वालों को एहतियात रहती है कि लेखापरीक्षा होने के बाद जनता को उनके कामकाज के तौर तरीके के बारे में पता चल जायेगा.’
राय ने कहा कि सार्वजनिक लेखापरीक्षक भी उसी तरह सरकारी राजकाज और प्रशासन संचालन को बेहतर करने के काम में लगा हुआ है जैसे प्रशासन की दूसरी एजेंसियां इस काम में लगी हैं. उन्होंने कहा, ‘लेखापरीक्षा करते हुये हम अपने को उनकी तरह नहीं बल्कि खुद को उनके स्थान पर बिठाकर स्थितियों को देखते हैं. हमारी लेखापरीखा अब एक बदलाव से गुजर रही है हम अब सकारात्मक तरीके से रिपोर्टिंग करने लगे हैं.’
राय ने कहा कि जनता के पैसे के इस्तेमाल की लेखापरीक्षा करने वाले सार्वजनिक लेखापरीक्षक को उद्देश्यपरक और विश्वसनीय होना चाहिये. उन्होंने कहा, ‘हम तभी विश्वास हासिल कर सकते हैं जब हमारी बेहतर साख होगी, सक्षम होंगे और नियंत्रणमुक्त होंगे. इसके साथ ही हम अपने काम के लिये भी जवाबदेह हों.’
No comments:
Post a Comment