प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह ने सोमवार को कोल ब्लॉक आवंटन पर लोकसभा में बयान देने की
कोशिश की, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सदस्यों के हंगामे के कारण
कुछ भी सुनाई नहीं दिया। बीजेपी सदस्य प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर
रहे हैं।
पीएम ने कोयला मंत्रालय संभालते हुए मंत्रालय के फैसलों की जिम्मेदारी लेते
हुए कहा कि मुझ पर लगे सभी आरोप तथ्यों से परे और गलत है। हंगामे को देखते
हुए सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
कोल ब्लॉक आवंटन पर आई सीएजी की रिपोर्ट को
भी पीएम ने विवादास्पद करार दिया। पीएम ने अपने 32 प्वाइंट के बयान में कहा
कि उनपर जो भी आरोप लगाए गए हैं वो सब बेबुनियाद हैं। उन्होंने ये भी कहा
कि सीएजी के आंकड़े विवादित हैं, क्योंकि उन आंकड़ों तक पहुंचने का जो आधार
है वो विवादास्पद है।
प्रधानमंत्री
ने ये भी कहा कि ये पॉलिसी 1993 से चली आ रही है और सबसे पहले यूपीए वन ने
ही जून 2004 में कोल ब्लॉक को नीलाम करने की बात सोची थी लेकिन जुलाई 2005
में पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान ने इस नीति को बदलने को लेकर कड़ा
एतराज जताया। उन्होंने कहा कि अगर राज्यों के फैसलों को दरकिनार किया जाता
तो इसे संघीय ढांचे पर प्रहार माना जाता।
पीएम
ने कहा कि गड़बड़ियों की सीबीआई जांच जारी है और कोई भी दोषी बच नहीं
पाएगा। बीजेपी के विरोध पर पीएम ने कहा कि वह ऐसा सोच समझकर कर रही है।
पीएम ने पीएसी और सीएजी की रिपोर्ट को चुनौती देने की बात भी कही। गौरतलब
है कि लोकसभा जब पीएम ने अपना बयान देना शुरु किया तो विपक्ष ने जमकर
शोर-शराबा किया। इसके बाद पीएम बाहर आए और उन्होंने मीडिया के सामने अपनी
सफाई दी।
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