Monday, July 8, 2013

मेट्रो की CCTV से बन रहे हैं अश्लील वीडियो क्लिप्स!


दिल्ली मेट्रो रेल में सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों से अश्लील वीडियो क्लिप बन रहे हैं और क्लिप को पॉर्न साइट्स पर डाला जा रहा है। जानकारी के मुताबिक अब तक मेट्रो में 250 से ज्यादा अश्लील वीडियो क्लिप बनाए जा चुके हैं। ये सिलसिला बीते 2 साल से धड़ल्ले से चल रहा है।
ये अश्लील वीडियो क्लिप पॉर्न साइट्स तक कैसे पहुंच रहे हैं इसे लेकर डीएमआरसी और मेट्रो की सुरक्षा संभालने वाली सीआईएसएफ के बीच विवाद शुरू हो गया है। मेट्रो के सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल का जिम्मा सीआईएसएफ के पास है। जबकि इससे जुड़ा डेटाबेस डीएमआरसी के जिम्मे है। वहीं सवाल ये है कि आखिर ये वीडियो क्लिप किसने बनाए?
जब आईबीएन7 ने सीआईएसएफ से इस बारे में पूछा तो सीआईएसएफ के पीआरओ हेमेन्द्र सिंह ने कहा कि जितनी भी फुटेज सामने आई है वो मेट्रो कोच के अंदर के हैं और इसकी मॉनिटरिंग खुद डीएमआरसी करती है। सीआईएसएफ का दावा है कि एमएमएस उनकी तरफ से लीक हुई है। वहीं डीएमआरसी ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
जानकारों का कहना है कि इस मामले में दोषी पाए जाने पर 5 साल की सजा का प्रावधान है। जानकारों के मुताबिक इस मामले में आईटी एक्ट के सेक्शन 66ई, 67 और आईपीसी की धारा 425 और 509 में मामला बनता है। आईटी एक्ट के दोनों मामलों में पांच साल तक सजा हो सकती है। दो से पांच लाख रुपए तक जुर्माना भी हो सकता है।

Friday, July 5, 2013

रिटायर होते ही खाली करने होंगे सरकारी बंगले

देश भर में सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जा जमाए बैठे नेताओं और अफसरों के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा है कि इस सिलसिले में दिशानिर्देश बनाकर बंगलों से अवैध कब्जों को हटाया जाए। बंगलों में बनाए गए स्मारकों को भी खत्म किया जाए।
दरअसल दिल्ली का लुटियंस जोन यानी संसद और राष्ट्रपति भवन के नजदीक के बंगलों में जो एक बार घुसा, वो फिर निकलने का नाम नहीं लेता। इनमें राजनीतिक दलों के आला नेता और सरकार के बड़े अधिकारी रहते हैं। दिक्कत ये है कि पद से हटने के बावजूद वे इन बंगलों में जमे रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। कोर्ट ने शुक्रवार को इस बाबत एक दिशानिर्देश जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक आवंटन की मियाद खत्म होने के एक महीने के अंदर बंगला या घर खाली किया जाए। वाजिब वजह बताने पर एक महीने की मोहलत दी जा सकती है। बंगला खाली न करने वालों पर बाजार भाव से जुर्माना लगाया जाए। घर खाली न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। बंगला खाली न करने वाले सांसदों के खिलाफ लोकसभाध्यक्ष को शिकायत भेजी जाए। लोकसभाध्यक्ष ऐसे मामलों पर कार्यवाही के लिए संसदीय समिति से कहें।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी सरकारी बंगले में कोई स्मारक नहीं बनना चाहिए। जो स्मारक बन गए हैं, उन्हें खाली कराया जाना चाहिए। सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमा किए गए आंकड़े के मुताबिक इस साल जनवरी में दिल्ली में ही 150 घरों और बंगलों पर अवैध कब्जा था। अब ये सरकार पर है कि वो इन दिशानिर्देशों का पालन कितने सख्ती से करती है।

इशरत पर CBI-NIA के अलग रुख क्यों: दिग्गी

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में एनआईए और सीबीआई के जरिए अलग अलग बातें सामने आ रही हैं। ऐसे में गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुलाकात कर मामले में रुख साफ करने की मांग की है। दिग्विजय ने कहा कि गृह मंत्रालय ये बताए कि क्या मुंबई धमाकों के आरोपी रिचर्ड हेडली ने आईबी को बताया था कि इशरत जहां के आतंकियों से संबंध थे।
इस मामले में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने आज गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुलाकात की। मुलाकात के बाद दिग्विजय ने कहा कि इस मामले पर एनआईए कुछ कह रही है और सीबीआई कुछ और कह रही है। सही क्या है, ये साफ होना चाहिए। दिग्विजय ने कहा कि नरेंद्र मोदी पर हमारा कुछ कहना नहीं है, जो भी इसमें शामिल है उसके खिलाफ कार्यवाही ज़रूर होनी चाहिए, चाहे वह कितनी भी बड़ी हस्ती क्यों न हो।
वहीं इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है। कांग्रेस नेता जगदंबिका पाल ने कहा कि डीजी बंजारा और पीपी पाण्डेय के खुलासे के बाद ये साफ़ हो गया के कहीं न कहीं इशरत जहां मामले में मोदी और अमित शाह का रोल तो था ही।
जबकि बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया में आतंकवाद से सबसे ज्यादा त्रस्त भारत है। जितनी चिंता सरकार को आतंकवादियों की है, उतनी चिंता देश की सुरक्षा की होनी चाहिए। डी जी वंजारा का बयान दबाव में दिया गया। कांग्रेस मोदी के पीछे पड़ी हुई है।

लखन भैया एनकाउंटरः 13 पुलिसवाले दोषी

मुंबई पुलिस की वर्दी एक बार फिर दागदार साबित हुई है। मुंबई की अदालत ने लखन भैया फर्जी एनकाउंटर मामले में, पूर्व सीनियर इंस्पेक्टर प्रदीप सूर्यवंशी सहित 13 पुलिसवालों सहित 21 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने इन सब को अपहरण और हत्या का दोषी पाया है। हालांकि इस मामले में पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को राहत मिल गई है। कोर्ट ने सबूत नहीं होने की वजह से प्रदीप शर्मा को बरी कर दिया है। पुलिस ने लखन भैया को अंडरवर्ल्ड सरगना छोटा राजन का करीबी बताया था।
11 नवंबर 2006 को मुंबई पुलिस ने वर्सोवा इलाके में मुठभेड़ के दौरान अंडरवर्ल्ड सरगना छोटा राजन के गुर्गे रामनारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया को मार गिराने का दावा किया था। पुलिस का कहना था कि लखन भैया एक व्यापारी का अपहरण करने के मकसद से वर्सोवा आया था और जवाबी कार्रवाई में मारा गया। लेकिन लखन भैया के परिवारवालों ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए पूर्व सीनियर इंस्पेक्टर प्रदीप सूर्यवंशी और पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा सहित 14 पुलिसवालों और 8 दूसरे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि अदालत ने सबूतों के अभाव में प्रदीप शर्मा को बरी कर दिया।
दरअसल पुलिस ने लखन भैया के मुठभेड़ की जो झूठी कहानी गढ़ी, वो अदालत में टिक नहीं पाई। परिवारवालों ने आरोप लगाया था कि लखन को नवी मुंबई से अगवाकर मुंबई ले जाया गया, जहां उसकी हत्या कर एनकाउंटर की फर्जी कहानी गढ़ी गई। अदालत में सबूत के तौर पर लखन के परिवार वालों ने वो फैक्स और टेलीग्राम पेश किए, जो उन्होंने लखन को पकड़े जाने के तुरंत बाद पुलिस कमिश्नर को भेजे थे। इस फैक्स और टेलीग्राम में परिवारवालों ने लखन के फर्जी एनकाउंटर का अंदेशा भी जताया था। सबूत के तौर पर यहीं फैक्स, टेलीग्राम इस केस में अहम साबित हुए।
सरकारी वकील विद्या कासले के मुताबिक मुख्य गवाह अनिल भेड़ा जिंदा होता तो हमारा केस और मजबूत होता, क्योंकि लखन भैया और भेड़ा को पुलिस ने एकसाथ उठाया था। प्रदीप शर्मा के खिलाफ ये सबसे बड़ा गवाह हो सकता था।
बांबे हाईकोर्ट के आदेश पर 2008 में इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच शुरू हुई और हाईकोर्ट के आदेश पर ही 2010 में इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने ही सबसे पहले प्रदीप शर्मा सहित 5 पुलिसवालों को गिरफ्तार किया। बाद में इस केस में 22 लोग गिरफ्तार किए गए, जिसमें 14 पुलिसवाले थे।