Tuesday, May 28, 2013

घरेलू और मल्टीनेशनल फार्मा कंपनियों के बीच झगड़ा

घरेलू और मल्टीनेशनल फार्मा कंपनियों के बीच फिर से विवाद खड़ा होता दिख रहा है। ग्लोबल ड्रग कंपनी फाइजर और भारत में जेनरिक दवा बनाने वाली कंपनियों की लॉबी इंडियन फार्मास्यूटिकल्स एसोसिएशन (आईपीए) के बीच बहस शुरू हो गई है। फाइजर ने अमेरिकी हाउस कमिटी को बताया था कि भारत में पेटेंट को लेकर माहौल खराब हो रहा है। फाइजर ने 13 मार्च को अमेरिकी हाउस कमिटी के सामने ये बयान दिया था।
अमेरिका और भारत व्यापार संबंधों पर सुनवाई के दौरान फाइजर ने फाइजर ने कहा था है कि भारत में इनोवेटिव दवाओं के लिए बिजनेस माहौल बिगड़ा है। भारत में अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन हो रहा है। घरेलू कंपनियों के फायदे के लिए एमएनसी के साथ भेदभाव होता है। अनिवार्य लाइसेंस के प्रावधानों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। जेनरिक कंपनियां अनिवार्य लाइसेंस के जरिए फायदा उठाती हैं।
फाइजर ने अमेरिकी सरकार को ये चिंताएं भारत के सामने रखने को कहा है। फाइजर के इस बयान पर आईपीए ने आपत्ति जताई है। 13 मई को जवाब देते हुए आईपीए ने कहा है कि फाइजर के बयान में सही तथ्य नहीं हैं। फाइजर ने अमेरिकी हाउस कमिटी में हुई सुनवाई को गुमराह किया है। भारतीय पेटेंट कानून टीआरआईपीएस करार के मुताबिक हैं।

बीजेपी के दागियों का जल्द करूंगा पर्दाफाश: जेठमलानी

मशहूर वकील और राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी को बीजेपी ने पार्टी से निकाल दिया है। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अनुशासनहीनता के आरोप में जेठमलानी को 6 साल के लिए निष्कासित करने का फैसला किया है। जेठमलानी अब से राज्यसभा में निर्दलीय सदस्य होंगे। निष्कासन के बाद जेठमलानी ने पार्टी अध्यक्ष को एक चिठ्ठी लिखी है और दावा किया है कि वो पार्टी के दागियों का पर्दाफाश कर देंगे।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की अगुवाई में हुई बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में ये फैसला लिया गया। जेठमलानी इन दिनों अमेरिका में हैं लिहाज़ा पार्टी ने बाकायदा खत के जरिये उन्हें ये सूचना दी है। बीजेपी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने बताया कि पार्टी ने शो कास नोटिस नवंबर में दिया था। इस नोटिस का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। पार्टी के खिलाफ कोई काम करेगा तो कार्रवाई होगी।
बीजेपी के दागियों का जल्द करूंगा पर्दाफाश: जेठमलानी
विवादों से रामजेठमलानी का पुराना नाता रहा है। उन्होंने पूर्ति विवाद के वक्त सार्वजनिक रूप से उस वक्त के बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी का इस्तीफा मांगकर पार्टी को मुश्किल में डाल दिया था। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी का रवैया यूपीए को लेकर नरम है। इन बयानों के चलते पार्टी ने उन्हें पहले निलंबित कर दिया था। लेकिन निलंबन बावजूद वो लगातार बीजेपी हाईकमान को चुनौती दे रहे थे।

अब यूपिक कार्ड बताएगा कितनी है आपकी प्रॉपर्टी

जैसे आधार कार्ड आपकी पहचान है वैसे ही अब आपकी प्रॉपर्टी का भी पहचान कार्ड बनेगा और ये कार्ड है यूपिक कार्ड यानी यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन कोड। इस यूपिक कार्ड के जरिए आपकी प्रॉपर्टी का पूरा ब्यौरा सामने आ जाएगा। यूपिक 12 डिजिट का कोड होगा जो आपकी प्रॉपर्टी की पहचान बनेगा। यूपिक सिस्टम में आपकी प्रापर्टी से जुड़ी हर जानकारी होगी, मसलन प्रॉपर्टी किसके नाम पर है, क्या मेजरमेंट है, कितना कवर एरिया है और एरिया के हिसाब से कितना प्रॉपर्टी टैक्स बनता है।
यूपिक के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत उत्तरी दिल्ली से की जा रही है। उत्तरी दिल्ली में करीब 12 लाख प्रॉपर्टी है और मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 4 लाख प्रॉपर्टी से ही टैक्स मिलता है। यूपिक यानि की यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन कोड के दायरे में कमर्शियल और रेजिडेंशियल दोनो तरह की प्रॉपर्टी आएंगी। इसके लागू होने के बाद सबसे बड़ा फायदा नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने में होगा।
यूपिक कार्ड के बाद प्रॉपर्टी टैक्स की चोरी रुकेगी और इसकी वसूली का सिस्टम पारदर्शी हो जाएगा। यूपिक के जरिए म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पास प्रॉपर्टी का पूरा ऑनलाइन ब्यौरा रहेगा और ऑनलाइन सिस्टम के जरिए आपको ये भी पता चल जाएगा कि आप पर कितना प्रापर्टी टैक्स बकाया है। कुल मिलाकर कहें तो नगर निगम की पैनी नजर रहेगी आपकी प्रॉपर्टी पर।
पिछले साल 2011-12 में उत्तरी नगर निगम ने 183 करोड़ रुपए प्रॉपर्टी टैक्स वसूला था लेकिन प्रशासन को उम्मीद है कि यूपिक आ जाने के बाद ये रकम दोगुनी हो जाएगी। फिलहाल यूपिक के पायलट प्रोजेक्ट पर 10 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा और इस साल के आखिर तक इसे पूरी उत्तरी दिल्ली में लागू कर दिया जाएगा।

एन श्रीनिवासन के विरोध में आए सिंधियां, मांगा इस्तीफा

फिक्सिंग और सट्टेबाजी के आरोप में दामाद मयप्पन की गिरफ्तारी के बावजूद बीसीसीआई चीफ की कुर्सी नहीं छोड़ रहे हैं। एन श्रीनिवासन के खिलाफ पहली बार किसी बड़े नेता ने आवाज उठाई है। मध्यप्रदेश क्रिकेट संघ के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खुल कर उनके विरोध में आ गए हैं। बीसीसीआई की वित्तीय समिति के चेयरमैन सिंधिया ने साफ तौर पर श्रीनिवासन के इस्तीफे की मांग की है। लेकिन श्रीनिवासन ने इस मांग को खारिज कर दिया है।
बीसीसीआई के भीतर से श्रीनिवासन के इस्तीफे की पहली पुरजोर मांग उठी। बोर्ड की वित्तीय समिति के चेयरमैन और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ कह दिया कि अगर परिवार में कोई गड़बड़ी होती है तो परिवार का मुखिया ही जवाबदेह और जिम्मेदार होता है। सिंधिया ने अपनी बातें इशारों में ही नहीं कहीं। उन्होंने सीधा कहा कि अब श्रीनिवासन को पद पर नहीं बने रहना चाहिए।
एन श्रीनिवासन के विरोध में आए सिंधियां, मांगा इस्तीफा
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि श्रीनिवासन को जांच पूरी होने तक पद छोड़ देना चाहिए। अगर वो बेदाग साबित हों तो पद पर लौट आएं। मैं उनकी जगह होता तो इस्तीफा दे देता। ये मुद्दा जवाबदेही का ज्यादा है और ये जवाबदेही मानते हुए ही श्रीनिवासन को इस्तीफा दे देना चाहिए।
सिंधिया का ये बयान बीसीसीआई से जुड़े बाकि राजनेताओं के लिए साफ संदेश है। वो राजनेता जो अलग अलग वजहों से श्रीनिवासन पर चुप्पी साधे बैठे हैं। लेकिन ये बात कैसे भूली जाए कि खामोश नेताओं में कांग्रेस नेता और आईपीएल के चेयरमैन राजीव शुक्ला भी हैं। इतना ही नहीं बीजेपी के अरुण जेटली भी खामोशी ओढ़े बैठे हैं।
श्रीनिवासन के इस्तीफे के मुद्दे पर खामोश जेटली जानते हैं कि चुप रहने में ही उनका फायदा है। इसी साल 2 सितंबर को श्रीनिवासन का कार्यकाल खत्म हो रहा है। विवादों को देखते हुए उन्हें एक साल का एक्सटेंशन मिलना मुश्किल है। ऐसे में जेटली को स्वाभाविक तौर पर बीसीसीआई की गद्दी मिलती दिख रही है। जानकारों का ये भी मानना है कि जेटली 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले ऐसे चुनाव में हार का जोखिम नहीं उठाना चाहते, इसीलिए भले ही श्रीनिवासन को पर कितने भी आरोप लग रहे हो चुप रहने में ही उनका फायदा है।
बीजेपी नेता कीर्ति आजाद का कहना है कि श्रीनिवासन से कोई कुछ नहीं कहना चाहता क्योंकि इनमें से हर कोई अध्यक्ष बनना चाहता है उन्हें लगता है कि अगर श्रीनिवासन के खिलाफ कुछ बोले तो उनके साथ आठ समर्थकों के वोट कट जाएंगे। आईपीएल में डांस ड्रामा सब है, मैदान के पीछे भी ड्रामा चल रहा था।
सियासत के शातिर खिलाड़ी आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला शुरू से ही श्रीनिवासन के खिलाफ खुलकर बोलने से बचते रहे। शुक्ला की चुप्पी का राज है कि बीसीसीआई प्रमुख श्रीनिवासन के इस्तीफे के बाद शुक्ला पर दबाव बढ़ जाएगा। आईपीएल में फिक्सिंग पर जवाबदेही और जिम्मेदार आईपीएल चेयरमैन के तौर पर सीधे राजीव शुक्ला ही बनती है, नैतिक आधार पर उनसे भी इस्तीफा मांगा जा सकता है।
जेटली और शुक्ला ही नहीं बोर्ड से जुड़े नरेंद्र मोदी, सीपी जोशी और फारुख अब्दुल्ला सरीखे दूसरे राजनेता भी श्रीनिवासन के इस्तीफे पर या तो चुप हैं या इस्तीफे की मांग के खिलाफ खिलाफ हैं।
सूत्रों की मानें तो दामाद गुरुनाथ मयप्पन की गिरफ्तारी के बाद श्रीनिवासन कुर्सी छोड़ने का मन बना चुके थे और आईपीएल फाइनल के बाद इस्तीफे का ऐलान करने वाले थे। लेकिन फाइनल से पहले कोलकाता में बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन डालमिया की डिनर पार्टी के बाद उनका इरादा बदल गया। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के दौरान अरुण जेटली ने श्रीनिवासन के इस्तीफे का मुद्दा उठाया। लेकिन डालमिया ने श्रीनिवासन को इस्तीफा देने से रोक दिया।
सूत्रों के मुताबिक डालमिया ने कहा कि इस्तीफा मांगने वाले ज्यादातर लोग राजनेता हैं और बीसीसीआई के किसी भी पदाधिकारी ने उनके इस्तीफे की मांग नहीं की है। डालमिया ने श्रीनिवासन को ये भरोसा भी दिलाया कि घरेलू क्रिकेट संघों का बहुमत उनके साथ है।
मौजूद समय में अंकगणित के लिहाज से भी श्रीनिवासन मजबूत पिच पर खेल रहे हैं। 30 घरेलू क्रिकेट संघों में से ज्यादातर का समर्थन श्रीनिवासन के साथ है। बीसीसीआई की 28 कमेटियों में भी श्रीनिवासन गुट का ही दबदबा है।