Tuesday, May 28, 2013

ICC से मिली असद रऊफ को इजाजत, आज देगें अपनी सफाई!

आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग विवाद में नाम उछलने के बाद गुपचुप तरीके से भारत छोड़ने वाले पाकिस्तानी अंपायर असद रऊफ आज अपनी सफाई देंगे। आईपीएल के मैचों में स्पॉट फिक्सिंग की साजिश में असद रऊफ के भी शामिल होने का शक है। असद रऊफ की प्रेस कॉन्फ्रेंस आज लाहौर में होगी।
सूत्रों के मुताबिक आईसीसी से मीडिया से बात करने की इजाजत मिलने के बाद रऊफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का फैसला किया है। विवाद के तूल पकड़ने के बाद चैंपियंस ट्राफी में अंपायरों के पैनल से असद रऊफ का नाम हटा दिया गया था। अपने शहर लाहौर में मीडिया से बातचीत में असद रऊफ ने कहा है कि स्पॉट फिक्सिंग मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है और वे पूरी तरह बेकसूर हैं।
ICC से मिली असद रऊफ को इजाजत, आज देगें अपनी सफाई!
उन्होंने चुनौती के अंदाज में कहा कि अगर किसी के पास उनके खिलाफ कोई सबूत है तो वो मीडिया के सामने लाए। भारत से भागने के बाद असद रऊफ कहीं नजर नहीं आ रहे थे और मीडिया की नजरों से बचने की कोशिश कर रहे थे। इस बीच पूरे मामले की जांच कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच के सूत्रों का दावा है कि विंदू ने गिरफ्तारी के बाद स्पॉट फिक्सिंग में रऊफ के शामिल होने की बात कबूली है। सूत्रों के मुताबिक विंदू ने तो ये भी माना कि उन्होंने ही रऊफ को भारत से भागने में मदद की और असद रऊफ को भारत का सिम कार्ड नष्ट करने की सलाह दी।

और गिरा रुपया, डॉलर के मुकाबले 56.17 पर पहुंचा रुपया

रुपये की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे की भारी गिरावट के साथ 56.17 पर खुला है, जो रुपये का 10 महीने का सबसे निचला स्तर है। वहीं मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 55.96 पर बंद हुआ था।
अल्पारी इंडिया के प्रमित ब्रह्मभट्ट का कहना है कि अमेरिका के अच्छे आर्थिक आंकड़ों के चलते डॉलर में मजबूती संभव है, और जिसका असर रुपये पर देखने को मिलेगा। लिहाजा रुपये के सीमित दायरे में ही रहने की उम्मीद है।
साथ ही महीने के आखिरी दिनों में तेल कंपनियों की तरफ से डॉलर की बढ़ती मांग से रुपये पर दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा शुक्रवार को आने वाले चौथी तिमाही के जीडीपी के आंकड़ों के कमजोर रहने से भी रुपया पर दबाव दिखेगा। ऐसे में आज के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 55.72-56.28 के दायरे में रह सकता है।

CM शिव के 'राज' में बदहाल हो रहीं स्वास्थ्य सेवाएं!

मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में कुष्ठ, मलेरिया और टीबी के फ्री इलाज के लिए जोर-शोर से आस्था और ममता अभियान की शुरुआत की। जबकि केंद्र सरकार ऐसी योजनाएं पहले से चला रही है। दूसरी तरफ आईबीएन7 की टीम जब राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का हालचाल जानने के लिए निकली तो हमें जगह-जगह बदहाल स्वास्थ्य सेवा दिखाई दी। इस बिगड़ती सेहत ने बड़ी-बड़ी घोषणाओं के तले कराह रही स्वास्थ्य सेवा पर सवालिया निशान लगा दिया है। आईबीएन 7 की इस खास मुहिम में मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवा की जमीनी हकीकत आपको भी सोचने के लिए मजबूर कर देगी।
हिंदुस्तान का दिल- मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। लेकिन इस दिल को तो रोगों ने घेर लिया है, सेहत बुरी है, नब्ज डूबती जा रही है, ये हम नहीं ये खुद सरकारी आंकड़े कह रहे हैं। पिछले साल मध्य प्रदेश में टीबी की वजह से एक हजार से ज्यादा मौत हुई। पिछले साल यहां सीधी जिले के चौपाई गांव में मलेरिया से 24 बच्चों की मौत हो गई। मलेरिया और टीबी से मध्यप्रदेश के सघन आदिवासी क्षेत्र में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं।
CM शिव के 'राज' में बदहाल हो रहीं स्वास्थ्य सेवाएं!
सूबे की गिरती सेहत को परखते हुए ही 11 अप्रैल को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मलेरिया, कुष्ठ और टीबी के मुफ्त इलाज समेत तमाम तरह की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आस्था और ममता योजना शुरू की।
ममता और आस्था अभियान की शुरुआत करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि एमपी में हमने हेल्थ और एजुकेशन को टारगेट किया है। खासकर एमएमआर, आईएमआर और कुपोषण। इसे बदलने के लिए विशेष अभियान चलाने की ज़रूरत थी इसलिए ममता और आस्था अभियान चालू किया है।
मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार दावा कर रही है कि ममता और आस्था अभियान में लोगों को मलेरिया, कुष्ठ और टीबी का मुफ्त इलाज मिलेगा। लेकिन राजधानी भोपाल से महज 70 किलोमीटर दूर होशांगाबाद, राज्य के बाकी जिलों की तरह मलेरिया, कुष्ठ और टीबी के मुफ्त इलाज की केंद्र की योजना यहां भी पहले से ही लागू है। फिर भी इन बीमारियां से अब कई लोगों की जान जा चुकी है।
होशंगाबाद के सीएचएमओ डॉ सुधीर जैसानी ने बताया कि हमारे यहां थोड़ा स्टॉफ की कमी है, जैसे हमारे यहां विशेषज्ञों के 58 पद खाली हैं। 24 पद रिक्त है, पचगनी में एक ही डॉक्टर है। जब वह डॉक्टर नहीं रहता तो दूसरा डॉक्टर भेजना पड़ता है।
सूबे में कुल 8000 अस्पताल हैं, लेकिन डॉक्टरों की तादाद सिर्फ 4040 है। हालांकि 4000 और डॉक्टरों की जरूरत बताई जाती है। लेकिन सरकार की नजर में सिर्फ 2500 डॉक्टरों ही और चाहिए। सच तो ये है कि प्रदेश में डॉक्टरों के 3000 पद खाली हैं। वहीं 2789 चिकित्सा अधिकारी हैं, जिनके 1951 पद खाली पड़े हैं। 1251 चिकित्सा विशेषज्ञ हैं, जबकि विशेषज्ञों के1806 पद खाली हैं। सूबे में 4300 नर्स स्टॉफ नर्स हैं, लेकिन नर्स के 3817 पद खाली भी हैं।
एमपी को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा योजना यानि एनआरएचएम के तहत इस बार 5000 करोड़ की मोटी रकम मिली है। पिछले साल इस फंड के इस्तेमाल की एक बानगी ये है कि होशंगाबाद के अस्पताल में एनआरएचएम फंड से 12 लाख रुपए का सफाई का सामान खरीद लिया गया। घोटाले के शक में अब इस केस की जांच की जा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में धोनी ने नहीं दिया सवालों का जवाब!

आईपीएल में हुई फिक्सिंग का बबाल थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। बीसीसीआई चीफ एन श्रीनिवासन इस्तीफा न देने पर अड़े है। वहीं नेताओं से लेकर क्रिकेट खिलाड़ियों तक कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। क्रिकेट में फिक्सिंग कांड के बाद पहली बार भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी कैमरों के सामने आए और उन्होंने फिक्सिंग के बारे में पूछे गए किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। चुप्पी साधे रहे, मुस्कुराते रहे। देखिए सवालों से घिरे धोनी की बेबसी, मजबूरी और चुप्पी पर हमारी विशेष रिपोर्ट।
चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक गुरुनाथ मयप्पन की गिरफ्तारी के बावजूद उसी टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी उस बारे में बात नहीं कर सकते, उस बारे में सवालों के जवाब नहीं दे सकते, भारतीय क्रिकेट अपने सबसे बड़े साख के संकट से दोचार है फिर भी उन्हें मुंह पर पट्टी बांध कर रखनी चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में धोनी ने नहीं दिया सवालों का जवाब!
पहला सवाल- आईपीएल के मैचों में फिक्सिंग के आरोपों पर था। लेकिन धोनी से सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। जब धोनी से भारतीय क्रिकेट टीम के बुरे दौर पर सवाल पूछा गया कि टीम के कप्तान के तौर पर धोनी क्या सोचते हैं। लेकिन धोनी ने इस सवाल का जवाब भी नहीं दिया। बस मुस्कराते रहे।
तीसरा सवाल- सट्टेबाजी के आरोप में गिरफ्तार विंदू दारा सिंह से धोनी के रिश्ते पर था। धोनी की पत्नी साक्षी विंदू के साथ मैच में मैदान पर देखी गईं थीं। धोनी से जब पूछा गया कि क्या धोनी विंदू दारा सिंह को जानते थे। जवाब में धोनी बरबस मुस्कुरा उठे।
चौथा सवाल- चैंपियंस ट्रॉफी के लिए धोनी जा रहे हैं। देश की जनता क्रिकेट प्रेमी है। ऐसे में क्या धोनी ये भरोसा दे सकेंगे कि अब क्रिकेट को ऐसी शर्मिंदगी नहीं उठानी पड़ेगी, इस सवाल के जवाब में भी धोनी की शांति था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में धोनी मौनी के अवतार में नजर आ रहे थे। आजतक भारत के इस बेहद तेजतर्रार कप्तान को ऐसी मुद्रा में कभी नहीं देखा गया है। किसी भी प्रेस कान्फ्रेंस में धोनी यूं लाजवाब नजर नहीं आए हैं। उनके पास सवालों के जवाब रहते हैं और वो क्रिकेट को नया विचार और नया रास्ता देने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन यहां बात मैच फिक्सिंग जैसे संगीन आरोपों से घिरे खिलाड़ियों की थी, यहां बात सट्टेबाजी के इल्जामों में गिरफ्तार उनकी आईपीएल टीम के मालिक गुरुनाथ मयप्पन की थी, यहां बात अपने दामाद की हरकतों के चलते इस्तीफे की मांग से घिरे बीसीसीआई चीफ एन श्रीनिवासन की थी।
धोनी का बचाव करते हुए बीसीसीआई के मीडिया मैनेजर रेफरी की तरह मैदान में उतर कर ये तय करते नजर आए कि सिर्फ और सिर्फ चैंपियंस ट्रॉफी के बारे में ही सवाल पूछे जाएं। जाहिर है बीसीसीआई का अघोषित गैग ऑर्डर लागू था, आदेश शायद शीशे की तरह साफ था कि खबरदार फिक्सिंग, सट्टेबाजी, श्रीनिवासन, मयप्पन, पैसे, खरीद फरोख्त और ईमान के बिकने जैसे शब्दों को सुन कर भी अनसुना कर दिया जाए। और शायद इसीलिए 16 मई से आईपीएल में फिक्सिंग की खबर आने के बाद धोनी लगातार मीडिया से बचते नजर आ रहे थे। यहां तक की धोनी आईपीएल फाइनल के पहले के दो मैचों और फाइनल मैच की प्रेस कॉन्फेंस से भी नदारद रहे।
ऐसे में कई सवाल खड़े होते हैं- पिछले दो हफ्ते भारतीय क्रिकेट के लिए काले हफ्ते रहे हैं, भारतीय कप्तान को सामने आ कर भारतीय क्रिकेट के इस दौर से निकलने की कामना करनी चाहिए थी, भरोसा देना चाहिए था कि अब क्रिकेट में बेईमानी की कोई जगह नहीं होगी। क्या बीसीसीआई को नहीं लगा कि ऐसा बयान दिलवा कर गिरती साख को थामा जा सकता था? क्या बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन का डर धोनी ही नहीं टीम कोच के सिर पर चढ़ कर बोल रहा है? और इसीलिए धोनी ने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।