Saturday, September 1, 2012

बीमा पॉलिसी सरेंडर करने पर मिलेगा ज्यादा रिटर्न

अगर आप समय से पहले इंश्योरेंस पॉलिसी सरेंडर करते हैं तो अब आपको पहले से ज्यादा रकम मिल सकती है। यही नहीं, बीमा नियामक आईआरडीए (इरडा) के प्रस्ताव के मुताबिक अगर पॉलिसीधारक 7 साल बाद पॉलिसी सरेंडर करता है तो उसे प्रीमियम की पूरी रकम वापस मिलेगी।
इरडा ने जीवन बीमा उत्पादों को बदलने की पूरी तैयारी कर ली है। इरडा के ड्राफ्ट प्रस्ताव के मुताबिक कंपनियों को अब ग्राहकों के पॉलिसी सरेंडर करने पर गारंटीड रकम देनी होगी।


कंपनियों को अब दूसरे और तीसरे साल में पॉलिसी सरेंडर करने पर प्रीमियम का 50 फीसदी हिस्सा, चौथे साल में पॉलिसी सरेंडर करने पर प्रीमियम का 75 फीसदी हिस्सा और पांच से सात साल के बीच पॉलिसी सरेंडर करने पर प्रीमियम का 90 फीसदी हिस्सा देना होगा। सात साल बाद पॉलिसी सरेंडर करने पर प्रीमियम की पूरी रकम देनी होगी।
फिलहाल 3 साल बाद पॉलिसी सरेंडर करने पर प्रीमियम का सिर्फ 30 फीसदी हिस्सा ही मिलता है और इसमें भी पहले साल के प्रीमियम की रकम शामिल नहीं होती है।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट हर्षवर्धन रुंगटा के मुताबिक इंश्योरेंस पॉलिसी धारकों के लिए भले ही ये अच्छी खबर है, लेकिन इंश्योरेंस कंपनियों को इस पर आपत्ति है। कंपनियों के मुताबिक इससे पॉलिसी होल्डर बिना किसी वजह के भी पॉलिसी सरेंडर कर सकते हैं। कंपनियों का ये भी कहना है कि इससे पारंपरिक जीवन बीमा उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
ये नियम नए प्रोडक्ट पर ही लागू होंगे और इनमें हेल्थ प्रोडक्ट और टर्म इंश्योरेंस प्रोडक्ट शामिल नहीं होंगे। यूलिप पर पहले से ही गारंटीड सरेंडर रकम का नियम लागू है। इरडा के इस प्रस्ताव पर फिलहाल इंश्योरेंस कंपनियों की रेगुलेटर से बातचीत जारी है और उम्मीद है ग्राहकों को राहत देने वाला ये नियम जल्द लागू हो जाएगा।

सचिन हुए बोल्ड, गावस्कर ने उठाया उम्र का सवाल!


राहुल द्रविड़ और वी वी एस लक्ष्मण के बाद अब सचिन तेंदुलकर की उम्र को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं और ये सवाल और कोई नहीं खुद लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर ने उठाया है। दरअसल ये मुद्दा शनिवार को बैंगलोर टेस्ट के दौरान सचिन के आउट होते ही उठा।
बैंगलोर टेस्ट के दूसरे दिन पहली पारी में सचिन तेंदुलकर आज एक बार फिर एक तेज गेंद को समझ नहीं पाए और गेंद उनके पैड और बैट के भीतर से निकलकर स्टंप पर जा लगी। नतीजा सचिन बोल्ड हो गए। सचिन ने 17 रन बनाए। उनको ब्रेसवेल ने बोल्ड किया। तेंदुलकर ने सहवाग के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 40 रन जोड़े।
सचिन के बोल्ड होने के वक्त गावस्कर और संजय मांजरेकर कमेंट्री कर रहे थे। दोनों ने इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा कि अगर सचिन इस तरह से बोल्ड हो रहे हैं तो ये अच्छे संकेत नहीं हैं।
गावस्कर ने बार-बार दोहराया कि इस तरह बोल्ड होना ये बताता है कि सचिन की उम्र हो रही है। इस दौरान दोनों ने जावेद मियांदाद का भी जिक्र किया जो क्रिकेट के अपने आखिरी दौर में इसी तरह आउट हो जाया करते थे।
गावस्कर ने कहा कि हमने ऑस्ट्रेलिया में देखा कि राहुल द्रविड़ लगातार इस तरह आउट हो रहे थे। ये किसी भी महान बल्लेबाज के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। दो लगातार पारियों में अगर सचिन बोल्ड होते हैं और उनके पैड और बैट के बीच के गैप से गेंद निकलकर स्टंप पर लगती है तो ये निश्चित रूप से चिंता की बात है। अगर कैच आउट हों या एलबीडब्ल्यू हों तो बात अलग होती है।
क्रिकेट एक्सपर्ट मनिंदर सिंह ने कहा कि द्रविड़ के संन्यास लेने से सचिन पर दबाव बढ़ गया है कि अगर शुरुआती दो विकेट जल्द ही गिर जाएं तो वो पारी को संभालें। हाल ही में मैंने पढ़ा कि वे बहुत ज्यादा डिफेंस की प्रैक्टिस कर रहे हैं जबकि सचिन ऐसे प्लेयर हैं जो अपने आक्रमण के लिए जाने जाते हैं। गेंदबाज उनसे डरता है लेकिन द्रविड़ के संन्यास लेने के चलते सचिन पर पारी को संभालने का दबाव बढ़ गया है। अब वे डिफेंसिव खेल रहे हैं और फुल लेंग्थ गेंद पर बोल्ड हो रहे हैं। ये निराशाजनक है क्योंकि सचिन जैसे महान प्लेयर की विदाई भी शानदार होनी चाहिए। सचिन पर उम्र का असर हो रहा है।
मांजरेकर ने कहा कि जावेद मियांदाद करियर के अपने अंतिम दौर में फुल लेंग्थ गेंद पर अक्सर बोल्ड हो जाया करते थे। टीम मीटिंग में हम अक्सर ये योजना बनाते थे कि मियांदाद को फुल लेंग्थ गेंद फेंकी जाए। यहां तक कि स्पिनरों से भी फुल लेंग्थ फेंकने को कहा जाता था।
पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने कहा कि अभी दो ही पारियों में सचिन बोल्ड हुए हैं। इसलिए ये कह देना कि उनपर उम्र हावी हो गई है सही नहीं होगा। दो पारियां किसी की भी खराब हो सकती हैं। सचिन संभवतः 2013 की ओर देख रहे हैं और चूंकि वो फिट हैं इसलिए उनका ऐसा सोचना गलत भी नहीं है।
पूर्व क्रिकेटर सैयद किरमानी ने कहा कि हर क्रिकेटर का अच्छा-बुरा समय होता है। हर खिलाड़ी की तकनीक अलग-अलग होती है। ये ठीक है कि उनकी उम्र काफी हो चुकी है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उनके रिफलेक्शन कम हो चुके हैं। अभी उनसे संन्यास की बात करना सही नहीं होगा।

MLA के बेटे को 25 रुपये महीने पर मिली करोड़ों की भूमि

यूपी के शहर अमरोहा में एक ऐसा घोटाला सामने आया है जिसके बारे में जानकर आप दंग रह जाएंगे। यूं तो सत्ताधारी बीएसपी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी में छत्तीस का आंकडा़ है, लेकिन इस शहर में नजारा कुछ और है। यहां समाजवादी पार्टी के एक दबंग विधायक के बेटे को करोड़ों की सरकारी जमीन कौड़ियों के भाव दे दी गई। इस जमीन पर शहर का कूड़ा डाला जाता था। जिस नगर पालिका परिषद की ओर से ये जमीन 25 रुपये महीने की लीज पर दी गई, उसके अध्यक्ष एक बीएसपी नेता हैं। जिला प्रशासन ने भी मामले पर चुप्पी साध ली है।
नगरपालिका की इस बीस बीघा जमीन का खसरा नंबर 5826 है। सरकार के राजस्व रिकार्ड में साफ है कि इस जमीन पर शहर का कूड़ा और खाद डाली जाएगी और ये सरकारी सार्वजनिक सम्पत्ति है। यूं तो जमीन का लैंड यूज बदले बगैर ये किसी को दी नहीं जा सकती, लेकिन बीएसपी नेता और नगर पालिका अध्यक्ष हाजी इकरार ना जाने क्यों समाजवादी पार्टी के दबंग विधायक महबूब अली के बेटे शाहनवाज पर मेहरबान हैं जिसके नाम पर ये जमीन आवंटित कर दी गई। सिर्फ 25 रुपये महीने पर।
लैंड यूज बदलने का अधिकार सिर्फ सरकार को होता है। वो भी तब जब शहर के विकास या अन्य आवश्यक आपूर्ति के लिए किसी जमीन के इस्तेमाल की जरूरत पड़े। जिले से प्रस्ताव पारित होकर सरकार को भेजा जाता है। वो पास होता है तो फिर जमीन हस्तांतरित की जाती है। लेकिन अमरोहा में ये सब नहीं किया गया। नगर पालिका परिषद अमरोहा ने 29 मई 2010 को ये जमीन शाहनवाज के नाम हस्तांतरित कर दी।
इस खेल का पता तब चला जब इस जमीन पर पेट्रोल पंप का निर्माण कार्य शुरू हुआ। पेट्रोल पंप करीब 2 हजार गज पर बन रहा है जिसके लिए विधायक के बेटे को भारत पेट्रोलियम पांच सौ रुपये महीना किराया देगा। किराये का करार तीस साल के लिए हुआ है। नगर पालिका कर्मचारियों ने इसे रजिस्ट्री कार्यालय में सत्यापति भी कर दिया है। इस मामले में जब नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी बी डी भट्ट से दफ्तर में सम्पर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने मिलने से ही मना कर दिया। वहीं, जिलाधिकारी कार्यालय की भूमिका भी जांच के घेरे में है। डीएम अभय कुमार कह रहे हैं कि वे मामले की तस्दीक करेंगे।
उधर, नगर पालिका चेयरमैन हाजी इकरार ने भी चुप्पी साध ली है। जिस दिन से ये मामला चर्चा में आया है, उस दिन से वे दफ्तर ही नहीं आए। फोन पर भी बात करने को तैयार नहीं। दूसरी ओर कांग्रेस इसे मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है।
इस मामले के खुलासे से विधायक महबूब अली खासे खफा हैं। वे मीडिया का नाम सुनते ही भड़क जाते हैं। उन पर 14 मुकदमे दर्ज हैं और वो हमेशा से विवादों में रहे हैं। सीएनएन आईबीएन के एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद मुलायम सरकार में उनकी मंत्री पद से छुट्टी हो गई थी। लेकिन बीएसपी सरकार में भी उनका रुतबा बना हुआ है। ये उनके दबदबे का सबूत ही है कि नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की जमीन मात्र 25 रुपये महीने किराये पर उन्हें दे दी गई।


बादल ने अमेरिकी अदालत से 90 दिनों की मोहलत मांगी

अमेरिका की एक अदालत के समन का जवाब देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपने खिलाफ दायर मानवाधिकार उल्लंघन के मामले का बचाव करने के लिए 90 दिनों की अतिरिक्त मोहलत मांगी है।
सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने अपनी कानूनी याचिका में बादल पर उन पुलिस अफसरों का बचाव करने का आरोप लगाया है, जो पंजाब में सिख समुदाय के खिलाफ प्रताड़ना, हत्याएं और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार रहे हैं।
मालूम हो कि एसएफजे की शिकायत पर विस्कॉन्सिन पूर्वी जिले की जिला अदालत ने बादल के खिलाफ आठ अगस्त को समन जारी किया था। बादल उस समय एक व्यापारी की बेटी के विवाह समारोह में हिस्सा लेने के लिए विस्कॉन्सिन के निजी दौरे पर थे।