Wednesday, July 3, 2013

कांग्रेस की राहत सामग्री में सोनिया-राहुल के पोस्टर

उत्तराखंड में आई भयानक प्राकृतिक आपदा को भी राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव के नजरिए से भुनाने में जुटे हैं। इस मामले में कांग्रेस ने तो हद ही कर दी। पार्टी की ओर से भेजी गई राहत सामग्री के पैकेट में सोनिया-राहुल के पोस्टर निकल रहे हैं।
जहां देश उत्तराखंड में आई आपदा के दर्द में डूबा है, वहीं संवेदनहीनता की हदें पार कर चुके नेता एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने में लगे हैं। आपदा राहत के लिए उत्तराखंड आए करीब 150 ट्रकों की सामग्री प्रचार का भी काम कर रही है।
कांग्रेस की राहत सामग्री में सोनिया-राहुल के पोस्टर
श्रीनगर बेस कैंप से हर रोज आपदा प्रभावित क्षेत्रों को भेजी जा रही राहत सामग्री के पैकेट में भारतीय युवा कांग्रेस के पंपलेट डाले जा रहे हैं। पंपलेट पर सोनिया गांधी, पीएम मनमोहन सिंह और राहुल गांधी की तस्वीरें भी लगाई गई हैं।

प्रलय में बंद हो गई भारत की ‘चाय की आखिरी दुकान’

उत्तराखंड में जल प्रलय की वजह से भारत-तिब्बत सीमा पर चाय की आखिरी दुकान के नाम से मशहूर दुकान भी बंद हो गई है। दुकान के मालिक चंद्र सिंह के मुताबिक अगर हालात ऐसे ही रहे तो भुखमरी की नौबत आ सकती है।
सीएनएन-आईबीएन की संवाददाता श्रेया ढौंढियाल ने इस इलाके का जायजा लिया। भारत-तिबब्त सीमा पर स्थित इस दुकान पर हर दिन पांच सौ से छह सौ सैलानी चाय की चुस्कियों का लुत्फ उठाते थे लेकिन उत्तराखंड में आई तबाही के बाद से ये दुकान वीरान पड़ी है।
प्रलय में बंद हो गई भारत की ‘चाय की आखिरी दुकान’
गौरतलब है कि 16 जून को उत्तराखंड के कई इलाकों में बादल फटने और चट्टान खिसकने की घटनाओं के चलते भारी तबाही हुई। इसमें हजारों सैलानियों को अपनी जान गंवानी पड़ी जबकि स्थानीय निवासियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

CBI को 'आजादी' पर सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा

केंद्र सरकार ने सीबीआई को स्वायत्त देने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में 41 पेज का शपथपत्र दाखिल किया है। इसमें बताया गया है कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या होगी। एफिडेविट में कहा गया है कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। इस कमेटी में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस शामिल होंगे। प्रधानमंत्री इस कमेटी के अध्यक्ष होंगे।
केंद्र सरकार के हलफनामे के बाद इस मामले के याचिकाकर्ता वकील मनोहर लाल शर्मा
CBI को 'आजादी' पर सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा
ने बताया कि एफिडेविट के मुताबिक कमेटी के तीनों सदस्यों की सहमति के बगैर सीबीआई निदेशक को न तो सस्पेंड किया जा सकेगा और न ही ट्रांसफर किया जा सकेगा। सीवीसी की शिकायत पर राष्ट्रपति को ही निदेशक को हटाने का अधिकार होगा। शपथपत्र पर अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।
सीवीसी की सिफारिश पर ही सीबीआई निदेशक को हटाया जा सकता है। सीबीआई निदेशक को हटाने का हक सिर्फ राष्ट्रपति को होगा। बता दें कि पिछले महीने ही सीबीआई की स्वायत्तता को कैबिनेट ने हरी झंडी दी थी। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडलीय समूह (जीओएम) ने इन कदमों की सिफारिश की थी।
हलफनामे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया है। बीजेपी जहां इसे सुप्रीम कोर्ट के दबाव में लिया गया कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस अपनी पीठ थपथपा रही है। उधर, जेडीयू ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए इस कदम की सराहना की है।
बीजेपी प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि सीबीआई के लगातार दुरुपयोग के बाद सुप्रीम कोर्ट के दखल पर केंद्र सरकार को ऐसा फैसला लेना पड़ा। एफिडेविट में बताई गई सभी बातों का पालन होता है या नहीं, ये देखने वाली बात होगी। वहीं कांग्रेस नेता जगदंबिका पाल ने कहा कि ये जो कदम कांग्रेस, यूपीए ने उठाया है, स्वागत योग्य कदम है। जो कदम बीजेपी, एनडीए अपने शासनकाल में उठा सकता था वो कांग्रेस ने उठाया।
जेडीयू सांसद शिवानंद तिवारी ने कहा कि अब जो सीबीआई के स्थिति होगी वो बेहतर होगी। ये कदम ठीक है। ये पहले से बेहतर होगा। सीबीआई के कामकाज में जो बदलाव आए उसे देखेंगे। बीजेपी के लोग भ्रष्टाचार की बात करते हैं, इस पर बड़ी हंसी आती है। पूरी बीजेपी येदुरप्पा को माला पहनाने में खड़ी है और ये भ्रष्टाचार की बात करते हैं।

Friday, June 21, 2013

शर्म.शर्म.शर्म...तबाही में फंसी औरतों से छेड़खानी

इस खबर को पढ़कर आप इंसानियत पर शर्मशार हो जाएंगे। उत्तराखंड में आई हिमायली सुनामी ने सैकड़ों की जिदंगी छीन ली है। हजारों लोग फंसे हुए है। लेकिन बदमाशों की करतूत देखिए की केदारनाथ और उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में फंसी महिला श्रद्धालुओं के साथ बदतमीजी कर रहे है। संकट में फंसे श्रद्धालुओं पर नेपाली बदमाशों ने हमला कर दिया। ये शरारती लोग ना केवल लोगों का सामान और उनके पैसे लूट रहे है ब्लकि वो महिलाओं की आबरू पर भी हमला कर रहे है। संकट में फंसी महिलाओं के साथ से लोग छेड़खानी करते है, बदतमीजी करते है और उनके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहे है। पड़ोसी देश से आए बदमाश महिलाओं के साथ दुष्कर्म कर उनकी हत्या कर रहे है। बदमाशों से घिरे इन लोगों तक अब तक की सहायता नहीं पहुंच पाई है। सेना के जवान बचाव कार्य में लगे है लेकिन राहत कार्य बहुत धीमा है। केदारनाथ और आसपास के पहाड़ी और जंगली इलाकों में नेपाल से आए बदमाश हथियारों के साथ इनपर हमला कर रहे है। इनका सामान लूट रहे है और महिलाओं के साथ बदसलूकी कर रहे है। रास्तें और पहाड़ों में फंसे लोग राहत और बचाव कार्य से खुश नहीं है। उन्हें ना तो खाने का सामान मुहैया करा जा रहा है और ना ही उन्हें दवाईयां मिल रही है। राहत का काम इतना धीरे चल रहा है कि कई लोग अब भूख-प्यास से मरने लगे है।