Saturday, May 4, 2013

भांजे से मेरा कोई कारोबारी रिश्ता नहीं: पवन बंसल

रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने शनिवार को कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उनके भांजे व्यवसायी विजय सिंगला ने कथित तौर पर एक रेलवे अधिकारी से प्रोन्नति के नाम पर 90 लाख रुपये की रिश्वत ली। उन्होंने इस मामले में खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया।
सिंगला तथा पांच अन्य की इस मामले में शनिवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तारी के बाद बंसल ने एक बयान जारी कर कहा कि चंडीगढ़ में मेरी बहन के बेटे के आवास पर शुक्रवार को हुई छापेमारी की घटना के संबंध में मेरा कहना है कि मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। रिश्तेदार मेरे आधिकारिक कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते और न ही निर्णयों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और न ही भांजे से कोई वित्तीय लेनदेन है।
भांजे से मेरा कोई कारोबारी रिश्ता नहीं: पवन बंसल
बंसल ने अपने सार्वजनिक जीवन में अधिक शुचिता बनाए रखने का दावा किया और इस मामले की सीबीआई द्वारा जल्द जांच पूरी किए जाने की उम्मीद जताई। गौरतलब है कि रेल मंत्री पवन कुमार बंसल के भांजे विजय सिंगला को घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई से रेलवे बोर्ड के सदस्य महेश कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। ये सभी गिरफ्तारियां सीबीआई ने की हैं। सिंगला पर महेश कुमार से प्रमोशन के लिए 90 लाख रुपये घूस लेने का आरोप है।
महेश कुमार को एक दिन पहले ही रेलवे बोर्ड का सदस्य बनाया गया था। आरोप है कि महेश कुमार ने रिश्वत की रकम मंजूनाथ के जरिए सिंगला को भेजी। संदीप गोयल पर सौदा कराने में मदद करने का आरोप है। CBI अब तक महेश कुमार से 10 घंटे तक पूछताछ कर चुकी है। आरोप है कि इस मामले में कुल 5 करोड़ नकद देने की डील हुई थी, बाकी के 5 करोड़ रेलवे कॉन्ट्रैक्ट के जरिए देने थे।

गिनीज बुक में दर्ज है घूस के फेर में फंसे महेश का नाम

प्रमोशन के लिए रेलमंत्री के भांजे विजय सिंगला को घूस देने के आरोप में गिरफ्तार हुए महेश कुमार 1975 बैच के इंडियन रेलवे सर्विस ऑफिसर हैं। उन्होंने रुड़की यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।
महेश कुमार पश्चिम रेलवे में महाप्रबंधक थे और उन्हें हाल ही में रेलवे बोर्ड मेंबर (स्टाफ) के तौर पर प्रमोशन मिला था। ये पद भारत सरकार के सचिव के बराबर होता है।
गिनीज बुक में दर्ज है घूस के फेर में फंसे महेश का नाम
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सिर्फ 36 घंटे के अंदर 'सबसे बड़े इंटरलॉकिंग रूट' को चालू करवाकर महेश कुमार अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करा चुके हैं।

Tuesday, April 30, 2013

सोनिया के उकसाने पर सांसदों ने मुझे बोलने नहीं दिया: सुषमा

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा है कि बीजेपी स्पीकर की बुलाई गई किसी भी बैठक में शामिल नहीं होगी। दरअसल सुषमा स्वराज आज जब संसद में बयान दे रही थीं तो उस दौरान कुछ कांग्रेसी सांसदों ने टोकाटाकी की। जिससे सुषमा स्वाराज नाराज हो गई हैं। सुषमा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधा और कहा है कि सोनिया को संसदीय परंपरा में विश्वास नहीं है। सुषमा स्वराज ने कहा है कि लोकसभा में उन्हें न बोलने देने के लिए सोनिया ने अपने सांसदों को उकसाया है।
सुषमा ने सोनिया गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सोनिया गांधी सब कुछ खुद ही संचालित करती हैं। सुषमा ने आरोप लगाया कि सर्वदलीय बैठक में कुछ भी तय हो, लेकिन संसद में वहीं होता है तो सोनिया चाहती हैं। सुषमा ने कहा कि जब आज उन्होंने सदन में बोलना शुरू किया तो सबकुछ ठीकठाक चल रहा था, लेकिन अचानक सोनिया के इशारे पर वहां हंगामा शुरू हो गया। साथ ही सुषमा ने कहा कि अब बीजेपी ने निर्णय लिया है कि वो अब स्पीकर की बुलाई गई किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लेगी।
सोनिया के उकसाने पर सांसदों ने मुझे बोलने नहीं दिया: सुषमा

सज्जन कुमार बरी, फैसले के बाद जज पर जूता उछला

कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के दामन पर 29 साल पहले लगा दंगे का एक दाग आज अदालत ने धो दिया। 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक केस से सज्जन कुमार को दिल्ली की कड़कड़ड़ूमा अदालत ने बरी कर दिया। सज्जन पर दिल्ली कैंट इलाके में पांच लोगों की मौत का मामला चल रहा था। कोर्ट ने सज्जन को तो बरी कर दिया, लेकिन उन्ही के साथ आरोपी बनाए गए बाकी पांच लोगों को दोषी करार दिया। जाहिर है कोर्ट के इस फैसले से दंगा पीड़ित खुश नहीं हैं।
दिल्ली के सिखों को वो मंजर नहीं भूलता जब 31 अक्टूबर 1984 को देश की राजधानी की सड़कों पर इंदिरा गांधी की हत्या का बदला पूरी कौम से लिया गया, सिखों के खिलाफ हिंसा दो दिनों तक बेरोकटोक चलती रही। वो मारे जाते रहे, जिंदा जलाए जाते रहे। 29 साल से उसी जख्म के साथ वो उन दंगों में इंसाफ की कानूनी जंग लड़ रहे हैं। 30 अप्रैल का दिन उनके लिए मायूसी लेकर आया, क्योंकि दिल्ली में कड़कड़डूमा की अदालत ने दंगों की आग से घिरे कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में एक ही परिवार के पांच सिखों की हत्या के इल्जाम से बरी कर दिया।
सज्जन कुमार बरी, फैसले के बाद जज पर जूता उछला
अतिरिक्त सेशंस जज जे आर आर्यन ने फैसला सुनाया कि सज्जन कुमार को हम बरी करते हैं, बाकी पांच आरोपियों को दंगा फैलाने का दोषी करार दिया जाता है। इसमें से तीन दोषियों पर हत्या यानि धारा 302 का दोष भी साबित हो गया है, 6 मई को उनकी सजा के ऐलान पर बहस की शुरुआत होगी।



29 साल पुराना केस, 3 साल तक चली सुनवाई, 17 गवाह और 3 चश्मदीद। सीबीआई ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दंगों का मुख्य साजिशकर्ता बताया था। उनपर हत्या, आपराधिक साजिश और भीड़ को भड़काने जैसे संगीन इल्जाम थे, लेकिन वो बरी हो गए और दूसरे पांच सह-आरोपियों को दोषी ठहरा दिया गया। पूर्व पार्षद बलवान खोखर, पूर्व विधायक महेंद्र यादव, किशन खोखर, गिरधारी लाल और कैप्टन भागमल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
जाहिर है सज्जन कुमार के बाइज्जत बरी होते ही दंगों के पीड़ित भड़क उठे, कोर्ट के बाहर हंगामा बरपा हुआ तो कोर्ट रूम के भीतर ही जज पर एक जूता तक उछाल दिया गया। अपने परिवार के पांच लोगों को दिल्ली कैंट के इस दंगे में खोने वाली जगदीश कौर ने इंसाफ मिलने तक अदालत में ही धरने पर बैठ गईं। दंगा पीड़ितों का कहना था कि उनके साथ इंसाफ नहीं हुआ।
गौरतलब है कि बाहरी दिल्ली से सांसद रहे कांग्रेस के धुरंधर नेता सज्जन कुमार 1984 में अपने सिख अंगरक्षकों के हाथों तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्याकांड के बाद चर्चा में आए थे। उसके बाद पूरे देश में हुए सिख विरोधी दंगों में 11 हजार सिख मारे गए अकेले दिल्ली में दंगाइयों ने 4 हजार सिखों को मार डाला था। दिल्ली पुलिस पर इस केस पर आंखें मूंदने और कांग्रेस नेताओं को बचाने के संगीन आरोप लगे। 2005 में जस्टिस जी टी नानावटी आयोग की सिफारिश पर ही सज्जन कुमार के खिलाफ ये मामले दर्ज किए गए थे। 2005 से दंगों के केस सीबीआई के पास है, लेकिन सबूतों के अभाव में सज्जन कुमार ज्यादातर मामलों में बरी हो चुके हैं, अब उनके खिलाफ सिर्फ एक केस बचा है, दिल्ली के सुल्तानपुरी में हुए दंगों में भी वो मुख्य आरोपी हैं, ये केस दिल्ली हाई कोर्ट में है। इसके अलावा नांगलोई दंगा केस में भी आरोपों के घेरे में वो हैं लेकिन इस केस में अब तक चार्जशीट तक दाखिल नहीं हो सकी है। 29 सालों से इंसाफ का इंतजार जारी है।