Wednesday, July 3, 2013

'केदारनाथ मंदिर को पुराने स्वरूप में लाने के लिए 3-4 साल'

केंद्रीय संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच ने कहा है कि उत्तराखंड में आई तबाही के बाद केदारनाथ मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक मंदिर को पुराने स्वरूप में लाने के लिए 3 से 4 साल का वक्त लगेगा। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए चंद्रेश कुमारी कटोच ने कहा है कि राज्य और केंद्र सरकार का काम है केदारनाथ मंदिर को बनाना। अगर मोदी को मदद ही करनी है तो वो राहत कोष में पैसे दे सकते हैं। आईबीएन7 के संवाददाता प्रशांत ने चंद्रेश कुमारी से बात खास बात की।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच ने बुधवार को कहा कि पिछले महीने उत्तराखंड में आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए 11वीं सदी के केदारनाथ मंदिर के पुनरोद्धार के लिए किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं है। कटोच ने कहा कि मंदिर के वास्तविक सौंदर्य को बहाल करने के लिए सबसे बेहतर विशेषज्ञ सरकार के पास हैं। इसे पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग पर छोड़ दिया जाना चाहिए। किसी अन्य को वहां नहीं जाना चाहिए, अन्यथा वे अपने विचार ले आएंगे। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के प्रस्ताव को केंद्र सरकार स्वीकार करेगी या नहीं, इस सवाल के जवाब में कटोच ने ये बातें कही।
'केदारनाथ मंदिर को पुराने स्वरूप में लाने के लिए 3-4 साल'
कटोच ने कहा कि मंत्रालय ने मंदिर को हुई क्षति का आकलन करने के लिए एक जांच दल भेजा था, लेकिन मौसम खराब होने की वजह से वह मौके पर नहीं पहुंच सका। जैसे ही मौसम ठीक होगा वे वहां पर जाएंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर के लिए जो भी धन की जरूरत होगी, वह पुरातत्व विभाग केंद्र से हासिल करेगा। राष्ट्रीय संस्कृति कोष और जनता के सहयोग से भी पैसा हासिल किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि चाहे तो राज्य सरकार भी मंदिर की मरम्मत के लिए धन दे सकती है। पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक प्रवीण श्रीवास्तव ने कहा कि केदारनाथ मंदिर 11वीं सदी में बना था और 18 सदी में इसके अग्रभाग का पुनर्निर्माण हुआ।

शबाना आजमी का टूटा हाथ, कहा- वामपंथी से ना जोड़ें!

अभिनेत्री शबाना आजमी की कलाई टूट जाने के कारण उनके बाएं हाथ में कम से कम छह से आठ सप्ताह के लिए प्लास्टर लगाया गया है। शबाना ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में रहने के दौरान मेरी कलाई में चोट आ गई और अब छह से आठ सप्ताह तक मेरा बायां हाथ प्लास्टर में रहेगा।
तीन साल पहले मार्च 2010 में शबाना अपने घर की सीढ़ियों पर फिसल कर गिर पड़ी थीं और तब उनका बायां पैर टूट गया था। लेकिन शबाना इन घटनाओं का जिक्र मजाकिया तरीके से करती हैं। उन्होंने कहा कि तीन साल पहले मेरा बायां पैर टूटा था और अब बायीं कलाई टूटी है। पर मेरा भरोसा कीजिए, बायीं तोड़-फोड़ का मेरे वामपंथी झुकाव से कोई लेना-देना नहीं है।
शबाना ने कहा कि पिछली बार की तरह इस बार ज्यादा मुश्किल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मेरी कलाई टूटी है, बाकी मैं आराम से चल फिर सकती हूं। फरहान (अख्तर) कहता है कि चलो कम से कम आपकी कलाई को कुछ दिन के लिए आराम मिला।
शबाना आजमी का टूटा हाथ, कहा- वामपंथी से ना जोड़ें!

नौकरी देने में अब भी दिल्ली नंबर-1, चेन्नई फिसला

रोजगार अवसर के मामले में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र 27 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहले स्थान पर बना हुआ है जबकि कोलकाता और बेंगलूरु क्रमशः 19 और 7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर है।
उद्योग संगठन एसोचैम की ओर से मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान देश में रोजगार के अवसरों पर जारी सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वर्ष की पहली तिमाही में देश में कुल 1,25,000 नई नौकरियों के अवसर आए। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में वित्त वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही के दौरान कुल 34 हजार नई नौकरियों के अवसर आए जो कि इसके पिछले वित्त वर्ष के 29 हजार के आंकड़ें से 16 प्रतिशत अधिक है।
नौकरी देने में अब भी दिल्ली नंबर-1, चेन्नई फिसला
क्षेत्र विशेष के मामले में भी आईटी और हार्डवेयर उद्योग में सबसे ज्यादा 47 प्रतिशत रोजगार के अवसर दिल्ली एनसीआर में रहे। जबकि शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार के मामले में इसकी हिस्सेदारी 14 प्रतिशत और बैकिंग, बीमा और वित्तीय क्षेत्र में यह 6 प्रतिशत रही। हालांकि आलोच्य अवधि में दिल्ली एनसीआर में आधारभूत संरचना, आतिथ्य, मानव संसाधन, एफएमसीजी, निर्माण, इंजीनियरिंग, ऑटो, टेलीकॉम और विनिर्माण क्षेत्र में नौकरियों के अवसर कम दिखे।
रिपोर्ट के मुताबिक रोजगार के मामले में दक्षिण भारत की स्थिति अपेक्षाकृति काफी कमजोर बनी रही। चेन्नई इसमें सबसे निचले स्थान पर रहा। पहली तिमाही में यहां नौकरियों के अवसर 21 फीसदी घटे। पिछले वित्त वर्ष अप्रैल-जून में यहां कुल 10,200 नई नौकरियों का सृजन हुआ लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष की समान अवधि में यह घटकर 8 हजार के स्तर पर पहुंच गया।
सूचना प्रोद्योगिकी और फार्मा उद्योग का केन्द्र समझे जाने वाले हैदराबाद की स्थिति भी इस मामले में अच्छी नहीं रही। समीक्षाधीन अवधि में यहां रोजगार के अवसर में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। देश की वाणिज्यिक राजधानी मुबंई की हालत भी खराब रही। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यहां नई नौकरियों मे जहां 14 प्रतिशत की तेजी रही थी। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की समान अवधि में यह घटकर 10 प्रतिशत रह गई।
मंदी के कारण कम हुईं नौकरी
एसोचैम के मुताबिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती के कारण भी रोजगार के हिसाब से पहली तिमाही खराब रही हालांकि दूसरी तिमाही में इसका प्रर्दशन कुछ बेहतर हो सकता है।

सोना खरीदना है तो रखें धैर्य, 20 हजार तक पहुंचेगा

पिछले 2 दिन में सोने का दाम करीब 1000 रुपये तक बढ़ गया है। बेशक ये तेजी अंतर्राष्ट्रीय बाजार के दम पर आई है और जानकार सोने में फिर से गिरावट की आशंका जता रहे हैं। लेकिन, घरेलू बाजार में सोने की चाल कैसी रहेगी, इसपर बाजार के जानकारों में सहमति नहीं है।
सोने में करीब 30 फीसदी की गिरावट के बाद कई विदेशी एजेंसियां अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भाव 1000 डॉलर के नीचे नीचे जाने की बात करने लगी हैं। घरेलू बाजार में भी सोने का दाम 20000 रुपये तक गिरने की अटकलें बढ़ गई हैं। हालांकि, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से घरेलू बाजार में अभी सोना ज्यादा नहीं गिरा है। यही वजह है कि कुछ जानकारों को अब सोने में ज्यादा गिरावट की संभावना नजर नहीं आ रही है।
सोना खरीदना है तो रखें धैर्य, 20 हजार तक पहुंचेगा
कीमतें बढ़ने की सबसे बड़ी वजह होती है मांग। जबकि सोने की मांग अब गिर रही है। इस साल गोल्ड ईटीएफ में करीब 583 टन सोने की बिकवाली हो चुकी है। ज्यादातर लोग सोने से पैसा निकाल रहे हैं। जून में अमेरिका में सोने के सिक्कों की बिक्री में भी भारी गिरावट दर्ज हुई है। सोने का फॉरेक्स मार्केट से नजदीक का नाता है। अगर डॉलर की साख बढ़ती है, तो बेशक अमेरिका में सोना गिरेगा। ऐसी हालत में रुपए की चाल कैसी रहेगी, ये बड़ा सवाल है। आज सोने का भाव 26, 063 रु प्रति दस ग्राम है। निवेश के लिहाज से सोना अभी खरीदना सही नहीं है।