Friday, October 5, 2012

नोबल शांति पुरस्कार के लिए सोनिया के नाम की सिफारिश

साल 2012 के नोबल शांति पुरस्कार के लिए कांग्रेस एवं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के नाम की सिफारिश की गई है।
इंटरनेशनल अवेकनिंग सेंटर ने सोनिया गांधी का नाम लगातार नौंवी बार नोबल शांति पुरस्कार से संबंधित समिति की स्वीकृत सूची में शामिल करने के लिए भेजा है।
 संगठन ने अपने सिफारिशी पत्र सोनिया गांधी विश्व शांति की पुजारी और एक महान सामाजिक कार्यकर्ता बताते हुए उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित करने का अनुरोध किया है।

Wednesday, October 3, 2012

केजरीवाल की पार्टी में नहीं शामिल होंगे कुमार विश्वास







अरविंद केजरीवाल के साथी कुमार विश्वास राजनीतिक पार्टी का हिस्सा नहीं बनेंगे लेकिन चुनाव में प्रचार अवश्य करेंगे।

पार्टी से न जुड़ने लेकिन प्रचार करने के प्रश्न पर कुमार विश्वास ने कहा कि अगर बॉलीवुड सितारे गोपाल कांडा के लिए प्रचार कर सकते हैं तो एक कवि होने के नाते वह भी पार्टी के लिए प्रचार कर सकते हैं। बता दें कि गीतिका सुसाइड केस में हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा जेल में हैं।
बकौल विश्वास, केजरीवाल की नई पार्टी को ज्यादा लंबे समय के लिए सत्ता नहीं चाहिए। सिर्फ 6 महीने में ही अगर 4 कानून पास हो जाएं तो संसद में बैठने का कोई औचित्य ही नहीं रह जाएगा। जनलोकपाल बिल, ग्राम स्वराज, राइट टू रिजेक्ट, राइट टू रिकॉल पास होगा तो सांसदों की जरूरत नहीं होगी। विपक्ष पर हमला करते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि उसने बीते सात साल में कुछ नहीं किया।
राजनीतिक विश्लेषक योगेन्द्र यादव ने कहा कि महिलाओं को आज राजनीति में हाशिए पर ढकेल दिया जाता है, उन्हें आगे आना चाहिए। वहीं, रह रहकर विरोधियों और टीम अन्ना पर हमला करने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने राजनीति में केजरीवाल का स्वागत किया है।

गलती मानने की बात कर मोदी का फिर सोनिया पर निशाना






गुजरात में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी की एंट्री से दो दिन पहले हमलावर हुए सीएम नरेंद्र मोदी के रुख में बार-बार बदलाव देखने को मिल रहा है। सोमवार को एक अखबार के हवाले से सोनिया गांधी के विदेशी दौरों पर सवाल खड़ा करने वाले सीएम मोदी शाम होते-होते खबर गलत होने की स्थिति में गलती कबूल करने की बात कर चुके थे लेकिन आज वो फिर सोनिया पर निशाना साधते नजर आए।

मोदी ने आज फिर सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा, अगर किसी ने सरकार के खर्च का ब्योरा मांगा है तो तीन साल बीत जाने के बाद भी उसे यह जानकारी क्यों नहीं दी गई? मालूम हो कि मोदी ने कल जिस खबर का हवाला दिया था वो एक आरटीआई के आधार पर थी जिसमें सोनिया के विदेश दौरे की जानकारी को लेकर बात कही गई थी। उसे दायर करने वाले एक्टिविस्ट ने सामने आकर ऐसी किसी भी जानकारी के मिलने से इनकार किया था।
अहमदाबाद के गांधीनगर महात्मा मंदिर में आज मोदी ने सोनिया के विदेशी दौरे पर एक बार फिर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या किसी भारतीय को इस पर सरकार द्वारा किए गए कुल खर्च को जानने का हक नहीं है? गौरतलब है कि गुजरात के मुख्यमंत्री के सोमवार के बयान के बाद उन्हें कांग्रेस नेताओं के हमले भी झेलने पड़े थे।


मोदी को जवाब देने के बजाय, तीन सवाल दाग गईं सोनिया







कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुजरात के राजकोट में रैली करके चुनावी बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के दावों को हकीकत से काफी दूर बताते हुए पूछा कि गुजरात में किसान खुदकुशी क्यों कर रहे हैं?

सोनिया ने गुजरात में लोकायुक्त न होने और वैट की ऊंची दर का सवाल भी उठाया। लेकिन सोनिया ने नरेंद्र मोदी के उन बयानों पर कोई टिप्पणी नहीं की जिसमें सोनिया के विदेशी दौरों का हिसाब मांगा गया था। साफ है कि कांग्रेस बीजेपी की उस चाल को लेकर चौकन्नी है जिसके जरिये वे गुजरात चुनाव को मोदी बनाम सोनिया बनाने की कोशिश हो रही है।
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी पिछले कई दिनों से सोनिया के विदेशी दौरों पर हुए खर्च को मुद्दा बनाने में जुटे हैं लेकिन सोनिया ने इस बयानबाजी में पड़ने के बजाय गुजरात के विकास को लेकर नरेंद्र मोदी के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने सीधे पूछा कि गुजरात में किसान खुदकुशी क्यों कर रहे हैं?
यही नहीं, सोनिया ने भ्रष्टाचार और महंगाई को लेकर बीजेपी के रवैये को दोमुंहा करार देते हुए पूछा कि आखिर गुजरात में लोकायुक्त का गठन क्यों नहीं किया गया और गुजरात सरकार वैट कम क्यों नहीं करती ताकि महंगाई कम हो।
सोनिया ने ये भी दावा किया कि रिटेल में एफडीआई से किसानों को फायदा मिलेगा। जाहिर है, सोनिया ने नरेंद्र मोदी से सीधे उलझने के बजाय उनके विकास के दावों को ही कसौटी पर कसा। ये कांग्रेस की सतर्क रणनीति का हिस्सा है।
कांग्रेस का आरोप है कि मोदी ने 2002 में गुजरात में हुए दंगों से उपजी सांप्रदायिक भावना को वोटों में बदला। उसे लगता है कि 2007 में सोनिया के मौत के सौदागर वाले बयान को गुजरात की अस्मिता का सवाल बनाकर मोदी ने कामयाबी पाई। कांग्रेस नहीं चाहती कि 2012 के चुनाव को मोदी बनाम सोनिया करने की कोशिश कामयाब हो।
यही वजह है कि सोनिया ने निजी हमले को मुद्दा बनाने के बजाय, बीजेपी की राजनीतिक-वैचारिक घेरेबंदी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूपीए सरकार सुधार कार्यक्रमों से पीछे नहीं हटेगी। बहरहाल, अब सबकी नजर मोदी पर टिकी हैं कि वो सोनिया के सवालों का क्या जवाब देते हैं।